



कोलकाता, 04 अगस्त (हि.स.)। आईआईटी खड़गपुर के प्लैटिनम जुबिली समारोह के अंतर्गत आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क में मंगलवार को द आर्ट ऑफ डूइंग इकोनॉमिक रिफॉर्म्स विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य तथा गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स के चांसलर संजीव सान्याल रहे।
कार्यक्रम में 450 से अधिक विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों, उद्योग जगत के विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों तथा नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संवाद का मुख्य विषय विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में प्रभावी आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की भूमिका रहा।
अपने संबोधन में संजीव सान्याल ने कहा कि भारत के विकास की गति केवल बड़े नीतिगत सुधारों से तय नहीं होती बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में छोटे, लक्षित और निरंतर सुधार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनावश्यक चरणों को समाप्त करना, पारदर्शिता बढ़ाना और प्रौद्योगिकी का विवेकपूर्ण उपयोग शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, त्वरित और नागरिक केंद्रित बनाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सुधार की शुरुआत वास्तविक प्रक्रियाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण तथा प्रमुख बाधाओं की पहचान से होनी चाहिए। विभिन्न प्रशासनिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि सुविचारित प्रक्रिया सुधारों से सरकारी सेवाओं की कार्यकुशलता बढ़ी, कार्य निष्पादन में लगने वाला समय कम हुआ तथा नागरिकों और उद्योगों को बेहतर परिणाम मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्रौद्योगिकी तभी प्रभावी सिद्ध होती है, जब उसके साथ प्रक्रियाओं का भी समुचित पुनर्गठन किया जाए।
संजीव सान्याल ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा केवल बड़े सुधारों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे, व्यावहारिक और नागरिक केंद्रित प्रक्रिया सुधारों से आगे बढ़ेगी। जब शासन सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनता है, तभी राष्ट्रीय परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार होती है।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने शिक्षा, अनुसंधान और नीति निर्माण के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब शिक्षण संस्थान ज्ञान, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नीति निर्माण के बीच सशक्त सेतु का कार्य करेंगे। आईआईटी खड़गपुर नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्रीय विकास के लिए सार्थक संवाद को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।
कार्यक्रम के समापन से पूर्व प्रो. सुमन चक्रवर्ती और संजीव सान्याल के बीच फायरसाइड चैट आयोजित की गई। इस दौरान भारत के आर्थिक सुधारों, नवाचार, उच्च शिक्षा, अनुसंधान, उद्यमिता तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में अकादमिक संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों के प्रश्नों और विचारों ने संवाद को और अधिक उपयोगी तथा प्रेरणादायी बनाया।
आईआईटी खड़गपुर रिसर्च पार्क की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम अकादमिक जगत, उद्योग, नीति निर्माताओं और समाज के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता