निर्वासित तिब्बती संसद ने 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ' का जताया विरोध, वैश्विक संगठनों को लिखा खुला पत्र

युगवार्ता    07-Aug-2026
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डिप्टी स्पीकर डोलमा सेरिंग।


धर्मशाला, 07 अगस्त (हि.स.)। 17वीं निर्वासित तिब्बती संसद ने चीन सरकार द्वारा पारित किए जा रहे तथाकथित कानून 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ' (जातीय एकता और प्रगति कानून) का कड़ा विरोध किया है। तिब्बती संसद ने इस मामले को लेकर विश्व के विभिन्न देशों सहित तिब्बत हितैषी संगठनों से चीन को इस कानून को पारित करने से रोकने तथा इसका विरोध जताने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि यह कानून तिब्बत और तिब्बतियों के हितों के खिलाफ है और तिब्बतियों की मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती इसे उन पर थोपा जा रहा है।

निर्वासित तिब्बती संसद की डिप्टी स्पीकर डोलमा सेरिंग तेखांग ने बताया कि एक वैश्विक पहल के तहत निर्वासित तिब्बती संसद ने सभी देशों के प्रमुखों, संसद के नेताओं और सदस्यों, संयुक्त राष्ट्र के अंगों, यूरोपीय संसद के अंगों, मानवाधिकार संगठनों, धार्मिक नेताओं और अंतर-धार्मिक नेताओं को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र का मुख्य विषय पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा पारित किए जा रहे तथाकथित कानून 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ' (जातीय एकता और प्रगति कानून) के बारे में है।

डिप्टी स्पीकर डोलमा सेरिंग ने कहा कि यह पत्र इसलिए लिखा है क्योंकि यह कानून ऊपर से तो अच्छा लगता है। इसमें एकता की बात कही गई है, लेकिन इस एकता का मतलब उन सभी लोगों के साथ अन्याय है जो कम्युनिस्ट नेतृत्व के तहत रहते हैं, जैसे तिब्बती, उइगर, मंगोल और वे सभी गैर-हान लोग। इस कानून के तहत गंभीर चिंता यह है कि यह न केवल कम्युनिस्ट नेतृत्व के तहत रहने वाले नागरिकों को प्रभावित करता है, बल्कि इसका असर उन सभी लोगों पर भी पड़ता है जो पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के बाहर रहते हैं। मानवाधिकार उल्लंघनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार, अल्पसंख्यकों के लिए न्याय पर लिखने वाले लेखक और सांस्कृतिक विविधता के अस्तित्व की परवाह करने वाले लोग, सभी इससे प्रभावित होंगे।

उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर चिंता यह है कि इस कानून के 54वें अनुच्छेद में बच्चों को भी कम्युनिस्ट नेतृत्व और पार्टी के प्रति वफादारी दिखाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। वे नाबालिगों का इस्तेमाल अपने माता-पिता की जासूसी करने और यह बताने के लिए कर रहे हैं कि उनके माता-पिता कैसे 'एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस लॉ' का उल्लंघन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब परिवार की भलाई और परिवार के सदस्यों के बीच का भरोसा बिगड़ता है, तो पूरी मानवता प्रभावित होती है। इसलिए, हम दुनिया के सभी जिम्मेदार नेताओं और नागरिकों से न्याय के लिए खड़े होने का आग्रह कर रहे हैं ताकि यह समस्या आपके दरवाजे तक न पहुंचे। उन्होंने विश्व के सभी देशों और संगठनों से आग्रह किया है कि हम सब मिलकर अत्याचारों और उस अन्याय के खिलाफ लड़ें जो दुनिया भर में एकता और प्रगति का मुखौटा ओढ़े हुए है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया

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