केंद्र ने कीमतों में हेरफेर, भ्रामक तौर-तरीकों पर नकेल कसने को ई-कॉमर्स नियम किए सख्त

युगवार्ता    10-Sep-2026
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उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


-उपभोक्ता संरक्षण मजबूत करने के लिए ई-कॉमर्स नियमावली में संशोधन

नई दिल्ली, 10 सितंबर (हि.स.)। केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने और पारदर्शिता लाने तथा कीमतों में पारदर्शिता, किसी उत्पाद को प्रमुखता से दिखाने को बढ़ावा देने के लिए ई-कॉमर्स नियमावली में संशोधन किया है। ये नई नियमावली 1 जनवरी, 2027 से प्रभावी होगी।

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने बताया कि केंद्र सरकार ने कीमतों में पारदर्शिता, किसी उत्पाद को प्रमुखता से दिखाने (स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग) पर रोक, खोज परिणामों में हेरफेर और भ्रामक तौर-तरीकों (डार्क पैटर्न) से जुड़े नियमों को सख्त करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन किया है।

केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले के विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियमावली, 2026 के माध्यम से उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियमावली, 2020 में संशोधन किया है, जिसका उद्देश्य ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक पारदर्शी और संतुलित नियामक ढांचे की सुविधा प्रदान करते हुए उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना है। संशोधित नियमावली से उपभोक्ता शिकायतों, खोज परिणामों, प्रायोजित लिस्टिंग, कीमतों में कटौती, डार्क पैटर्न और विक्रेता प्रकटीकरण के प्रावधानों को और मजबूती मिलेगी।

संशोधित नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को कीमत में कटौती की घोषणा करते समय कम की गई कीमत के साथ ‘पूर्व कीमत’ बतानी होगी। ‘पूर्व कीमत’ से आशय उस कीमत से है, जिस पर छूट की घोषणा से पहले के 30 दिन में उस उत्पाद की पेशकश सबसे कम कीमत पर की गई थी। इस नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसे खोज परिणामों में हेरफेर करने से रोक दिया गया है, जो उपयोगकर्ताओं को गुमराह करते हों यानी खोज से संबंधित सवाल के लिए परिणामों की प्रासंगिकता को प्रभावित करते हों।

मंत्रालय ने बताया कि अब प्रायोजित सूचीबद्धता (किसी उत्पाद को अन्य की तुलना में प्राथमिकता से दिखाने) की पहचान स्पष्ट और प्रमुख रूप से करनी होगी। साथ ही अब ई-कॉमर्स कंपनियों को भ्रामक तौर-तरीकों (डार्क पैटर्न) की रोकथाम और नियमन के लिए 2023 में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

भ्रामक तौर-तरीकों से आशय ऐसे डिजाइन या कारोबारी तरीकों से है, जिनके जरिये उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई विकल्प चुनने, खरीदारी करने या निर्णय लेने के लिए प्रभावित या गुमराह किया जाता है। ई-कॉमर्स कंपनियों को हर साल अपना स्व-मूल्यांकन करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र भी प्रदर्शित करना होगा।

मंत्रालय के संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) की ‘कन्वर्जेंस’ प्रक्रिया में भागीदार बनना होगा। विभाग ने कहा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को 2025 में कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 5,11,196 यानी करीब 29 प्रतिशत शिकायतें ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं। नियमों के अनुसार ई-कॉमर्स कंपनियों को शिकायतकर्ता को उनके शिकायत अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति उपलब्ध करानी होगी। नियमों के मुताबिक मार्केट प्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को सोच-समझकर ये निर्णय लेने में मदद करने के लिए ‘बेस्ट बिफोर’ या ‘यूज बिफोर’ तारीख तथा रिटर्न, रिफंड, वारंटी, डिलिवरी और भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी देनी होगी।

विभाग ने कहा कि आयातित वस्तुओं के मामले में आयातक का विवरण और वस्तु के मूल देश की जानकारी भी देनी होगी। वहीं, नियमों में मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं के ब्योरे का निर्धारित उद्देश्यों के लिए अब स्पष्ट और सकारात्मक सहमति के बिना इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है।इसके अलावा ई-कॉमर्स मंच आपूर्ति से इतर सेवाओं के लिए एक-साथ जोड़कर शुल्क नहीं लगा सकेंगे। हालांकि, लॉयल्टी या सदस्यता कार्यक्रम इसके अपवाद होंगे। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं को ई-कॉमर्स क्षेत्र में अनुचित व्यापार व्यवहार से बचाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 अधिसूचित किए गए थे।

उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि इन संशोधनों का उद्देश्य कारोबार सुगमता सुनिश्चित करने के साथ एक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-केंद्रित ई-कॉमर्स व्यवस्था तैयार करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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