नेपाल में बाढ़ से 783 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाओं को पहुंचा नुकसान

युगवार्ता    10-Sep-2026
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रसूवगढ़ी हाइड्रोपावर परियोजना स्थल


काठमांडू, 10 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट में 783 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। राष्ट्रीय योजना आयोग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण समेत संयुक्त तकनीकी टीम की ओर से तैयार त्वरित क्षति एवं आवश्यकता आकलन रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट में 13 जलविद्युत परियोजनाएं और करीब 24 मेगावाट क्षमता की पांच सौर ऊर्जा परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। बाढ़ के कारण ऊर्जा और सड़क क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। ऊर्जा और ग्रिड प्रणाली की बहाली तथा पुनर्निर्माण के लिए ही करीब 3 खरब 90 अरब 62 करोड़ नेपाली रुपये की आवश्यकता होने का अनुमान लगाया गया है।

बाढ़ से 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1, 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी, 120 मेगावाट की रसुवा-भोटेकोशी, 20 मेगावाट की लांगटांग खोला, 22 मेगावाट की चिलिमे, 5 मेगावाट की मैलुंग खोला, 24 मेगावाट के त्रिशूली हाइड्रोपावर सेंटर, 14.1 मेगावाट के देवीघाट, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए, 37 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3बी और 15.6 मेगावाट की मिडिल त्रिशूली गंगा समेत कई परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा 25 मेगावाट क्षमता वाली नुवाकोट सौर ऊर्जा परियोजना सहित अन्य सौर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ ने परियोजनाओं के बिजली उत्पादन ढांचे, पहुंच मार्ग, ट्रांसमिशन सिस्टम और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण और ऊर्जा प्रणाली को फिर से सामान्य स्थिति में लाने के लिए बड़ी धनराशि की जरूरत होगी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाढ़ प्रभावित परियोजनाओं में कार्यरत 917 कर्मचारी और श्रमिक अभी भी लापता हैं। बाढ़ के करीब दो सप्ताह बाद भी बड़ी संख्या में श्रमिकों और कर्मचारियों का कोई पता नहीं चल पाया है।

लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस, विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और तकनीकी दल तथा संबंधित कंपनियों के तकनीकी विशेषज्ञ जुटे हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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