विकसित भारत का संकल्प सेतु बनेगा भारतीय भाषा समागम 2026

युगवार्ता    10-Sep-2026
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भारतीय भाषा समागम


- हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय भाषा समागम-2026 का आयोजन करेगा हिन्दुस्थान समाचार

- देश के विभिन्न भाषाई राज्यों के 19 भाषाई विद्वान ‘भारतीय भाषा सम्मान’ से होंगे सम्मानित

वाराणसी, 10 सितम्बर (हि.स.)। भारत की भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि युगों-युगों से संजोई गई सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान और जीवन-दृष्टि का विराट भंडार हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर से पश्चिमी छोर तक फैली इन भाषाओं में भारत की असंख्य लोक परंपराएं और ज्ञानधाराएं प्रवाहित हैं। ‘भारतीय भाषा समागम-2026’ भाषाओं के विराट सागर और विकसित भारत के संकल्प के बीच सेतु बनेगा।

भारतीय भाषाओं की आवाज ‘हिन्दुस्थान समाचार’ समूह की ओर से हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर 13 सितम्बर को दोपहर दो बजे ‘भारतीय ज्ञान परम्परा, क्षेत्रीय भाषाएं और समृद्ध भारत’ विषयक ‘भारतीय भाषा समागम-2026’ का आयोजन किया जाएगा। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का गांधी अध्ययन पीठ सभागार इस भव्य समागम का साक्षी बनेगा। समागम में यह मंथन होगा कि भारतीय भाषाओं में पीढ़ियों से सुरक्षित ज्ञान को आधुनिक शिक्षा, शोध, तकनीक, नवाचार और विकास से जोड़कर समृद्ध और विकसित भारत की यात्रा को कैसे गति दी जा सकती है।

विकसित भारत के निर्माण में बौद्धिक और सांस्कृतिक ताकत बनेगा भाषाई विविधता

हिन्दुस्थान समाचार समूह के मुख्य समन्वयक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार व झारखंड के क्षेत्रीय सम्पादक डा. राजेश तिवारी ने बताया कि समागम का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही होगा कि भारतीय भाषाओं को केवल अतीत की विरासत मानकर संरक्षित करने के बजाय उन्हें भविष्य के विकास की शक्ति बनाया जाए। भाषाओं में सुरक्षित लोकज्ञान, साहित्य, दर्शन, प्रकृति-बोध, चिकित्सा परंपराएं, सामाजिक अनुभव और सांस्कृतिक स्मृतियां आधुनिक शोध और तकनीक के लिए नई संभावनाओं का आधार बन सकती हैं। यही कारण है कि भारतीय भाषा समागम का विमर्श भाषा संरक्षण से आगे बढ़कर ज्ञान-संरक्षण, ज्ञान-सृजन और ज्ञान के आधुनिक उपयोग तक जाएगा। लक्ष्य होगा कि भारत की भाषाई विविधता विकसित भारत के निर्माण में उसकी बौद्धिक और सांस्कृतिक ताकत बने।

भाषाओं की ज्ञानधारा को विकसित भारत की शक्ति बनाने का ‘पाथेय’ देंगे मुकुल कानिटकर

मुख्य समन्वयक ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री होंगे। मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर होंगे। मुकुल कानिटकर भाषाओं की ज्ञानधारा को विकसित भारत की शक्ति बनाने का ‘पाथेय’ देंगे। पूर्व मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी और उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त पदुमनारायण (पीएन) द्विवेदी विशिष्ट अतिथि होंगे। अध्यक्षता हिन्दुस्थान समाचार समूह के अध्यक्ष अरविन्द भालचंद्र मार्डीकर करेंगे।

भाषाओं की विविधता में संस्कृति की धारा

डा. राजेश तिवारी ने कहा कि भारत का भाषाई संसार जितना विराट है, उतना ही गहरा उसका सांस्कृतिक आधार भी है। अलग-अलग क्षेत्रों की भाषाओं ने अपने-अपने लोकजीवन, साहित्य, दर्शन, कला, परंपराओं और अनुभवों को सहेजा, लेकिन इन विविध धाराओं के भीतर भारतीय संस्कृति की साझा चेतना निरंतर प्रवाहित होती रही। संस्कृत, पाली और प्राकृत से लेकर तमिल सहित दक्षिण भारतीय भाषाओं तथा हिंदी, बांग्ला, मराठी, असमिया, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम व देश की अन्य भाषाओं तक फैली परंपराओं ने भारत की ज्ञान-संपदा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया। हर भाषा भारत की विराट सांस्कृतिक तस्वीर का एक रंग है और सभी रंग मिलकर भारत की पहचान को पूर्ण करते हैं।

काशी में भाषाई धाराओं का संगम

गंगा के तट पर बसी काशी सदियों से भारत की ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रही है। अब यही काशी भारतीय भाषाओं की विविध धाराओं को एक मंच पर लाकर उन्हें भविष्य के भारत की जरूरतों से जोड़ने का साक्षी बनेगी। समागम में देश के विभिन्न भाषाई राज्यों के 19 भाषाई विद्वानों को ‘भारतीय भाषा सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही हिन्दुस्थान समाचार समूह की पत्रिका ‘युगवार्ता’ और ‘नवोत्थान’ के भारतीय ज्ञान परंपरा, क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति एवं समृद्ध भारत पर केंद्रित विशेषांकों का लोकार्पण होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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