
- शिक्षक संवाद संगोष्ठी में बोले आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य - तरुणी संवाद में बालिकाओं को भी समाज में मित्रता बढ़ाने का संदेश
वाराणसी, 11 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि विविधता का उत्सव आयोजित करना भारतीय संस्कृति की विशेषता है। भारत सांस्कृतिक विविधता में भेद नहीं मानता। अलग-अलग मानवीय समूहों के आने पर विरोध स्वाभाविक है, लेकिन उन्हें एक सूत्र में पिरोने की विलक्षण क्षमता भारतीय संस्कृति में है। भारत की पहचान का आधार उसकी आध्यात्मिकता है, जिसका विस्तार देश के हर कोने में दिखाई देता है। डॉ. वैद्य शुक्रवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के शताब्दी भवन सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी महानगर की ओर से आयोजित शिक्षक संवाद संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय अपनी पहचान को लेकर आज भी सशंकित हैं और 'इंडिया' के मोह से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इंग्लैंड, जर्मनी और जापान जैसे देश दोबारा अपने पैरों पर खड़े हुए। इजरायल ने भी अपनी विकास यात्रा लगभग शून्य से शुरू की, लेकिन भारत आज भी अपने पूर्वजों और अपनी विरासत के संदर्भ में स्पष्ट दृष्टि विकसित नहीं कर पाया है। डॉ. वैद्य ने भारत से व्यक्ति के संबंध को समझाते हुए कहा कि हम भारत रूपी बगीचे के केवल माली नहीं, बल्कि उसके पौधे हैं। बगीचे में आग लगने पर माली उसे छोड़ सकता है, लेकिन पौधा उसी आग में झुलस जाएगा। इसी प्रकार हमारा अस्तित्व भी भारत भूमि से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि 'गंगा-जमुनी तहजीब' को भारतीय संस्कृति की पूरी तस्वीर मानना उचित नहीं है। यमुना भी गंगा में मिलकर अपना अस्तित्व उसी में समाहित कर लेती है। इसी तरह भारत को केवल कृषि प्रधान देश कहना भी अधूरा दृष्टिकोण है। प्राचीन भारत उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में भी समृद्ध था। भारतीय दुनिया के विभिन्न हिस्सों में व्यापार के लिए गए, लेकिन उन्होंने न तो किसी देश को लूटा और न ही किसी को गुलाम बनाया।
नई पीढ़ी से उपदेश नहीं, संवाद जरूरी
युवा पीढ़ी द्वारा माता-पिता की बात न सुनने से जुड़े सवाल पर डॉ. वैद्य ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्धति में बदलाव हो रहा है। नई पीढ़ी के साथ संवाद आवश्यक है। उसे उपदेश देने के बजाय समझने और उसके साथ संवाद स्थापित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहले हमें पढ़ने के लिए सीखना होगा और फिर सीखने के लिए पढ़ना होगा।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि अपनी संस्कृति और इतिहास के संदर्भ में अध्ययन एवं अध्यापन किया जाना चाहिए। ज्ञान का अपने जीवन में प्रयोग समाजहित के लिए किस प्रकार किया जाए, यह भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य होना चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग संघचालक प्रो. जयप्रकाश, नगर संघचालक डॉ. सुनील सहित मंचस्थ अतिथियों द्वारा महामना मदन मोहन मालवीय के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। छात्राओं ने विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत इग्नू के उपकुलसचिव वनमाली सिंह ने किया। विषय स्थापना डॉ. अनिल सिंह ने की। संचालन डॉ. सत्यप्रकाश पाल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अतुल ने किया।
बालिकाओं को भी समाज का नेतृत्व करना होगा : वैद्य
इससे पहले चेतगंज स्थित आर्य महिला पीजी कॉलेज में आयोजित तरुणी संवाद को संबोधित करते हुए डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि बालिकाओं को भी समाज का नेतृत्व करना होगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हथेली का अंगूठा सभी उंगलियों के साथ मेलजोल रखता है और कार्य के समय स्वयं प्रमुख रूप से दिखाई नहीं देता, उसी प्रकार बालिकाओं को भी समाज में मित्रता और सहयोग की भावना बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय बालिकाओं को स्वयं नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी, जबकि सफलता मिलने पर अपने साथियों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। भारत को जानने के लिए डॉ. वैद्य ने तीन सूत्र—पढ़कर, देखकर और सुनकर—बताए। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए तरुणियों को समय देना होगा और यह समय बेहतर कार्य प्रबंधन के माध्यम से निकाला जा सकता है।
उन्होंने बालिकाओं को लक्ष्य के प्रति निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जिस प्रकार नदी अपने किनारों की मर्यादा को स्वीकार करते हुए लगातार समुद्र की ओर बढ़ती है, उसी प्रकार उन्हें भी अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रधानाचार्या प्रो. रचना दूबे तथा नेस्ट भारत की पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रमुख निधि मंचस्थ रहीं। विषय प्रस्तावना तेजस्वीनी वाजपेयी ने रखी और संचालन शेफाली कश्यप ने किया।
दोनों कार्यक्रमों में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय टोली सदस्य रामाशीष, प्रांत प्रचारक रमेश, डॉ. आर.एन. चौरसिया, डॉ. वैभव जायसवाल, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. हेमंत मालवीय, डॉ. अभिषेक ढोबले, विभाग कार्यवाह राजेश, सह विभाग कार्यवाह आशीष और विभाग प्रचारक नितिन सहित अन्य पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी