
नई दिल्ली/तेहरान, 12 सितंबर (हि.स.)। ईरान ब्रिक्स देशाें द्वारा स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। ईरान का मानना है कि बैंक की सदस्यता से उसे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरानी न्यूज एजेंसी फ़ारस ने बताया कि भारत में आयाेजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले शुक्रवार काे राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि ब्रिक्स के तहत एक विशेष बैंक बनाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य देश इसमें निवेश बढ़ाएंगे, जिससे सदस्य देशों के बीच डॉलर पर निर्भरता कम करते हुए लेन-देन संभव हो सकेगा।
वहीं, ईरान के वित्त मंत्री सैयद अली मदनीज़ादेह ने कहा कि प्रतिबंधों का सामना कर रहे ईरान के लिए स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाना और डॉलर तथा पश्चिमी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना बेहद महत्वपूर्ण है। स्थानीय मुद्राओं और अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना ईरान के लिए ब्रिक्स की प्रमुख उपलब्धियों में से एक हो सकता है।
की स्थापना जुलाई 2015 में शंघाई में आयाेजित ब्रिक्स के पांच संस्थापक देशों ने की थी। बैंक का मुख्य उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचे और सतत विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। नए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 के अंत तक एनडीबी ने करीब 44 अरब डॉलर मूल्य की 141 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। उज़्बेकिस्तान के शामिल होने के बाद बैंक की सदस्यता बढ़कर 10 देशों तक पहुंच गई है।
ईरान लंबे समय से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। ऐसे में डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों का इस्तेमाल उसके लिए रणनीतिक महत्व रखता है। ईरान की एनडीबी में संभावित सदस्यता से उसे ब्रिक्स देशों के साथ वित्तीय सहयोग बढ़ाने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक वित्तीय स्रोत हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी