ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक सुधार और ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व पर जोर

युगवार्ता    13-Sep-2026
Total Views |
ब्रिक्स लोगो


नई दिल्ली, 13 सितंबर (हि.स.)। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन रविवार को दो दिनों की गहन चर्चाओं और बैठकों के बाद सम्पन्न हो गया। सम्मेलन में वैश्विक सुधार और ग्लोबल साउथ को प्रतिनिधित्व देने पर जोर रहा। इस दौरान भारत के इस केंद्रीय प्रस्ताव पर व्यापक सहमति बनी कि ब्रिक्स को केवल घोषणात्मक होने के बजाय व्यावहारिक, कार्रवाई योग्य और जन-केंद्रित होना चाहिए। इसके अलावा ब्रिक्स में स्पष्ट शब्दों में आतंकवाद की निंदा की गई और स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और आपदा से निपटने की क्षमता जैसे क्षेत्रों में सहयोग पक्का किया गया।

भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता का उपयोग भागीदारी को सीमित करने के बजाय व्यापक बनाने के लिए किया। भारत की अध्यक्षता परिणामों पर केंद्रित रही। शिखर सम्मेलन ने चार प्राथमिकता स्तंभों में परिणामों के महत्वपूर्ण पैकेज को मंजूरी दी। विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में 50 से अधिक ठोस परिणाम समाने आए। ब्रिक्स में दुर्लभ खनिजों को भी सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चा में ग्लोबल साउथ को केंद्र में रखकर विचार विमर्श किया गया। इसी को प्रधानमंत्री ने अपने हस्तक्षेप में कहा ‘हमें ग्लोबल साउथ की उम्मीद के बारे में बहुत अच्छी तरह से पता होना चाहिए और तभी हम उन उम्मीदों को पूरा करने के लिए उन्हें वैश्विक मंच पर असरदार तरीके से बता सकते हैं।’

ब्रिक्स शिखर वार्ता के समापन के बाद विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) और ब्रिक्स के शेरपा सुधाकर दलेला, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और मल्टीलेटरल इकोनामिक रिलेशंस के जॉइंट सेक्रेटरी शंभू हक्की मौजूद रहे।

शेरपा सुधाकर दलेला ने बताया कि समावेशी विकास पर प्रधानमंत्री के केंद्रीय संदेश में कहा गया कि ब्रिक्स में विकसित समाधान केवल ब्रिक्स तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए। इन्हें वैश्विक दक्षिण की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना और सुलभ बनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स के तीसरे दशक में प्रवेश करने के साथ ही, दुनिया उससे न केवल विचारों और प्रतिबद्धताओं की, बल्कि ठोस परिणामों की भी अपेक्षा करती है।

दलेला ने कहा कि भारत ने अध्यक्षता के दौरान बातचीत से इतर ब्रिक्स को लोगों, खासकर युवाओं से जोड़ने पर जोर दिया। गांधीनगर में युवा शिखर सम्मेलन और युवा परिषद आयोजित हुई। महिला सशक्तीकरण के लिए कार्यसमूह और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का डिजिटल संग्रह बनाया गया। खेलों के जरिए जन-जन संपर्क बढ़ाने के लिए खेल तकनीक कार्यसमूह, ब्रिक्स रन और पारंपरिक खेलों का आयोजन हुआ।

विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) ने कहा कि पहले दिन के बंद सत्र में सदस्य देशों ने वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद जैसे मुद्दों पर खुलकर विचार रखे और नई दिल्ली घोषणा को अपनाया। दूसरे दिन के खुले सत्र में इन चर्चाओं और सहमति को व्यापक ब्रिक्स परिवार तथा ग्लोबल साउथ के साझेदार देशों तक पहुंचाया गया।

उन्होंने कहा कि खुले सत्र में भारत की प्राथमिकताओं को सभी सदस्य देशों, साझेदारों और आउटरीच देशों के नेताओं से मजबूत समर्थन मिला। नेताओं ने भारत की अध्यक्षता के दौरान करीब 30 शहरों में विभिन्न स्तरों पर 350 से अधिक बैठकों और कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना की। दलेला के अनुसार, नई दिल्ली घोषणा में भी भारत की अध्यक्षता के दौरान किए गए प्रयासों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि आउटरीच सत्र में सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों और देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। इनमें अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष, बुरुंडी के राष्ट्रपति, फिलीपींस, जो आसियान का वर्तमान अध्यक्ष है, उरुग्वे, जो सीईएलएसी का वर्तमान अध्यक्ष है और बहरीन, जो खाड़ी सहयोग परिषद का अध्यक्ष है, शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में इसे बड़ा ब्रिक्स परिवार बताया।

दलेला ने कहा कि शिखर सम्मेलन का आउटरीच हिस्सा साझा प्राथमिकताओं पर व्यापक चर्चा के लिए बनाया गया था। इसकी थीम भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और प्रधानमंत्री के ‘मानवता सर्वोपरि’ के दृष्टिकोण से जुड़ी थी। चर्चाओं में समावेशी विकास और ग्लोबल साउथ को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर रहा।

उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों को भी सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई और नई दिल्ली घोषणा में भी इसका उल्लेख किया गया है।

----------

हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

Tags