
नई दिल्ली, 13 सितंबर (हि.स.)। देश में आयोजित हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्वीकृत ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बड़ा बढ़ावा दिया गया है। घोषणापत्र में स्वास्थ्य प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के लक्ष्य को हासिल करने में टीसीआईएम की बढ़ती भूमिका को औपचारिक मान्यता दी गई है। साथ ही ब्रिक्स हेल्थ ट्रैक के तहत टीसीआईएम पर एक विशेष ‘ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य समूह’ (एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप) स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया गया है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इस निर्णय को वैश्विक स्वास्थ्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में टीसीआईएम को मान्यता मिलना पारंपरिक चिकित्सा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर है। प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह सदस्य देशों के बीच ज्ञान साझा करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा। भारत वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक साझेदारी के माध्यम से आयुर्वेद व अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि सुरक्षित, प्रभावी और किफायती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित हो सके।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि घोषणापत्र ब्रिक्स देशों के बीच टीसीआईएम पर एक संरचित सहयोग की नींव रखता है। यह कार्य समूह साक्ष्य साझा करने, शोध साझेदारी बढ़ाने और विनियामक व गुणवत्ता मानकों को सुधारने में मददगार साबित होगा। भारत अपने आयुष इकोसिस्टम के जरिए वैज्ञानिक अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित प्रथाओं को बढ़ावा देकर इस सहयोग में सक्रिय भूमिका निभाएगा।
घोषणापत्र में उपचारात्मक और निवारक उद्देश्यों के लिए औषधीय पौधों और हर्बल उत्पादों पर केंद्रित अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया है। इसमें इस बात को रेखांकित किया गया कि ब्रिक्स देशों की पारंपरिक औषधीय पद्धतियां सुरक्षित और प्रभावी उत्पाद विकसित करने का बड़ा आधार बन सकती हैं। साथ ही, सदस्य देशों के राष्ट्रीय संदर्भों के अनुरूप साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण और नियामक ढांचे के जरिए इन पद्धतियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत इस वर्ष 21 जुलाई को चंडीगढ़ में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर एक अहम बैठक आयोजित की गई थी। उस बैठक में विशेषज्ञ कार्य समूह की संदर्भ शर्तों (टीओआर) पर सर्वसम्मति बनी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025-2034 के परिप्रेक्ष्य में भी ब्रिक्स के इस कदम को पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक एकीकरण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर