
भाेपाल, 14 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश में राशन की दुकान पर लाइन, कागजी प्रक्रिया और भुगतान की पारंपरिक व्यवस्था अब बदलने जा रही है। मध्य प्रदेश में राशन वितरण डिजिटल क्रांति की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के हितग्राहियों को अब उनके मोबाइल वॉलेट में मिलने वाले डिजिटल रुपये के टोकन के जरिए राशन उपलब्ध कराने की तैयारी है। भोपाल और इंदौर में शुरू होने वाला यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली का पूरा मॉडल बदल सकता है। यह कहना है मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का है। हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी काे दिए साक्षात्कार में उन्हाेंने वर्तमान में विभाग द्वारा किये जा रहे नवाचाराें और आगामी कार्ययाेजना पर विस्तृत चर्चा की है। प्रस्तुत है मंत्री राजपूत से बातचीत के मुख्य अंश........
सवाल : मध्यप्रदेश में राशन वितरण को डिजिटल रुपये से जोड़ने की पहल को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब : यह मध्यप्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा उद्देश्य है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक उनका राशन पारदर्शी, सुरक्षित और बिना किसी परेशानी के पहुंचे। डिजिटल रुपये और सीबीडीसी आधारित व्यवस्था से राशन वितरण की प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ा जाएगा। भोपाल और इंदौर से शुरू होने वाला यह प्रयोग सफल रहा तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को और अधिक आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
सवाल : भोपाल और इंदौर में शुरू होने वाली इस व्यवस्था में आम हितग्राही को क्या बदलाव महसूस होगा?
जवाब : पात्र हितग्राही को उसकी खाद्यान्न पात्रता के अनुसार डिजिटल टोकन मिलेगा। उचित मूल्य दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद टोकन का उपयोग होगा और पात्रता के अनुसार गेहूं, चावल तथा अन्य खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा। हमारा प्रयास है कि राशन लेने की प्रक्रिया सरल, कम कागजी और पूरी तरह पारदर्शी हो।
सवाल : अब तक विभाग की सबसे बड़ी उपलब्धियों में आप किसे मानते हैं?
जवाब : हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रदेश में 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 23 हजार करोड़ रुपये मूल्य का करीब 66 लाख मीट्रिक टन नि:शुल्क राशन वितरित किया गया है। यह अपने आप में बहुत बड़ा अभियान है। हमारा प्रयास रहा है कि पात्र परिवार को उसके हिस्से का राशन समय पर और पूरी पारदर्शिता के साथ मिले।
सवाल : पीडीएस में पात्रता को लेकर भी बड़े स्तर पर सत्यापन हुआ है। इसके बारे में बताइए।
जवाब : जी हां। पिछले एक साल में पीडीएस के करीब 1 करोड़ 66 लाख नए हितग्राहियों की ई-केवाईसी की गई है और अब तक लगभग 93 प्रतिशत हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। साथ ही कम उम्र के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांग हितग्राहियों सहित करीब 15 लाख लोगों को ई-केवाईसी से छूट दी गई है, ताकि तकनीकी प्रक्रिया उनके लिए परेशानी का कारण न बने।
सवाल : ई-केवाईसी की प्रक्रिया को भी तकनीक से आसान बनाया गया है?
जवाब : बिल्कुल। बायोमेट्रिक के साथ-साथ ‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा भी दी गई है। हमारा प्रयास है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि हितग्राही की सुविधा के लिए भी हो।
सवाल : अपात्र और डुप्लीकेट हितग्राहियों को लेकर क्या कार्रवाई की है और क्या नए पात्र हितग्राहियों को भी जोड़ा गया है?
जवाब : सत्यापन के बाद पीडीएस पोर्टल से करीब 35 लाख अपात्र, डुप्लीकेट और मृत हितग्राहियों के नाम हटाए गए हैं। इससे एक तरफ वास्तविक पात्र हितग्राहियों की पहचान मजबूत हुई है, वहीं सरकारी संसाधनों की बचत भी हुई है। अपात्र नाम हटाने से हर महीने करीब 33 करोड़ रुपये मूल्य के राशन की बचत हो रही है। करीब 14 लाख नए हितग्राहियों के नाम जोड़े गए हैं। उन्हें पात्रता पर्ची जारी कर नि:शुल्क राशन दिया जा रहा है। हमारा सिद्धांत स्पष्ट है- जो पात्र है, उसे लाभ मिले और जो अपात्र है, उसके नाम पर सरकारी संसाधन खर्च न हों।
सवाल : उचित मूल्य दुकानों के संचालकों के लिए विभाग ने क्या सुधार किए हैं?
जवाब : प्रदेश की करीब 28 हजार उचित मूल्य दुकानों के कमीशन भुगतान की व्यवस्था ऑनलाइन की गई है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है और दुकानदारों को भी सुविधा मिली है। इसके अलावा पीडीएस के तहत 39 नए प्रदाय केंद्र शुरू किए गए हैं, जिससे प्रदेश में कुल 308 प्रदाय केंद्र हो गए हैं। इससे खाद्यान्न की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है।
सवाल : राशन दुकानों को लेकर सरकार की सोच में क्या बदलाव आया है?
जवाब : हम चाहते हैं कि उचित मूल्य की दुकानें ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए सुविधा के केंद्र बनें। इसी दिशा में इंदौर की 30 राशन दुकानों को ‘जन पोषण केंद्र’ के रूप में अपग्रेड कर पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। यहां राशन के साथ विविध पोषण सामग्री और दैनिक उपयोग की अन्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। भविष्य में इस मॉडल को और बेहतर बनाकर जरूरत के अनुसार विस्तार दिया जा सकता है।
सवाल : राशन के परिवहन और वितरण में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
जवाब : मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम के तहत प्रदाय केंद्र से राशन दुकान और राशन दुकान से हितग्राही तक राशन पहुंचने की पूरी व्यवस्था को एसएमएस के माध्यम से पारदर्शी किया गया है। हितग्राही को जानकारी मिलती रहे, यही हमारी प्राथमिकता है। इसके अलावा राशन दुकानों से वितरित किए गए राशन में पारदर्शिता के लिए हितग्राहियों की सूची वर्ष में दो बार—26 जनवरी और 2 अक्टूबर को ग्रामसभा में पढ़ी जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर भी सामाजिक निगरानी मजबूत होती है।
सवाल : खाद्यान्न परिवहन में तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है?
जवाब : मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के परिवहनकर्ताओं के रूट टेक्नोलॉजी के माध्यम से निर्धारित किए गए हैं। इससे परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी हुई है और विभाग को करीब 42 लाख रुपये प्रतिमाह की बचत हो रही है। योजना के वाहनों में जीपीएस लगाया गया है और स्टेट लेवल कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से उनकी निगरानी की जा रही है। इससे खाद्यान्न परिवहन की पूरी प्रक्रिया पर बेहतर नजर रखी जा सकती है।
सवाल : खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी राशन के अलावा गैस आपूर्ति से भी जुड़ी है। इस क्षेत्र में क्या काम हुआ है और पिछले दो वर्षों में कितनी महिलाओं को इसका लाभ मिला?
जवाब : महिलाओं को रसोई के खर्च में राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। उज्ज्वला योजना के तहत लाड़ली बहनों सहित गैर-उज्ज्वला श्रेणी की पात्र लाड़ली बहनों को 450 रुपये में गैस सिलेंडर रिफिल की सुविधा दी जा रही है। इस पर सरकार हर महीने औसतन करीब 50 करोड़ रुपये का अनुदान दे रही है। पिछले दो वर्षों में उज्ज्वला योजना के अंतर्गत बहनों को करीब 911 करोड़ रुपये के अनुदान से 617 लाख गैस सिलेंडर रिफिल कराए गए हैं। यह महिलाओं और परिवारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सवाल : शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड गैस को लेकर विभाग की क्या योजना है?
जवाब : प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क एवं विस्तार नीति लागू की गई है। गैस कंपनियों को एनओसी सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें, इसके लिए सिंगल विंडो पोर्टल भी बनाया गया है। प्रदेश में अब तक 403 सीएनजी पेट्रोल पंप खोले गए हैं और करीब 3 लाख 51 हजार घरों में पाइप के माध्यम से पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। आने वाले समय में गैस आधारित स्वच्छ और सुविधाजनक ऊर्जा व्यवस्था को और विस्तार देने पर जोर रहेगा।
सवाल : क्या डिजिटल रुपये के प्रयोग को भविष्य में अन्य योजनाओं से भी जोड़ा जा सकता है?
जवाब : निश्चित रूप से इसकी संभावनाएं हैं। अभी हमारा फोकस भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट को सफल बनाने पर है। यदि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो अनुभव के आधार पर इसे प्रदेश के अन्य हिस्सों तक विस्तार दिया जा सकता है। हमारी कोशिश है कि तकनीक गरीब के लिए सुविधा बने, बाधा नहीं। डिजिटल व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य हितग्राही को उसके अधिकार का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है।
सवाल : खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के लिए आपका व्यापक विजन क्या है?
जवाब : हमारा विजन बिल्कुल स्पष्ट है- किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य, गरीब को उसके हक का पूरा राशन और आम उपभोक्ता को उचित कीमत पर गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं उपलब्ध कराना। हम पीडीएस को केवल राशन बांटने की व्यवस्था नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा की मजबूत प्रणाली के रूप में देख रहे हैं। तकनीक, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से हम व्यवस्था को लगातार बेहतर बना रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे