आपदा में माता-पिता खोने वाले बच्चों के लिए नेपाल सरकार ने बनाई विशेष योजना

युगवार्ता    14-Sep-2026
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प्रतीकात्मक तस्वीर


काठमांडू, 14 सितंबर (हि.स.)। आपदा के कारण माता-पिता को खोने वाले, परिवार से अलग हुए तथा विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के बचपन और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नेपाल सरकार ने ‘शिशु स्याहार योजना’ लागू की है।

राष्ट्रीय बाल दिवस के अवसर पर सोमवार को महिला, बालबालिका एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने ‘बचपन की रक्षा: भविष्य की सुरक्षा’ नारे के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया है। योजना के तहत आपदा के बाद तत्काल संरक्षण को दीर्घकालीन देखभाल, पुनर्वास और पारिवारिक पुनर्मिलन से जोड़ा गया है।

महिला बाल बालिका तथा सामाजिक सुरक्षा मंत्री सीता बादी ने कहा कि आपदा बच्चों से उनका घर, परिवार या अभिभावक छीन सकती है, लेकिन उनके बचपन और भविष्य की सुरक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बाढ़ प्रभावित, माता-पिता को खोने वाले, परिवार से अलग हुए और विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर उनके सर्वोत्तम हित के आधार पर संरक्षण एवं देखभाल की व्यवस्था की जाएगी।

मंत्रालय के अनुसार बच्चों को सुरक्षित आवास, भोजन, स्वास्थ्य उपचार, मनोसामाजिक सहयोग, परिवार की तलाश और पारिवारिक पुनर्मिलन जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिन बच्चों को दीर्घकालीन संरक्षण की आवश्यकता होगी, उनकी व्यक्तिगत स्थिति और सर्वोत्तम हित का मूल्यांकन कर उचित देखभाल एवं संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

योजना के शुरुआती कार्यान्वयन के तहत ललितपुर में विशेष संरक्षण की आवश्यकता वाले बचाए गए बच्चों के लिए अस्थायी बाल संरक्षण सेवा केंद्र शुरू किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की स्थिति की पहचान, विस्तृत आकलन और आवश्यक संरक्षण सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय के तंत्र को भी सक्रिय किया गया है।

नेपाल में २६ अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति के बाद मंत्रालय ने प्रभावित बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मंत्रालय ने कहा कि आपदा के बाद बच्चों के परिवार से अलग होने, असुरक्षित होने तथा हिंसा, शोषण और मानव तस्करी के खतरे को देखते हुए बाल संरक्षण तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

मंत्री बादी ने कहा कि बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा, दुर्व्यवहार, तस्करी और ओसारपसार के साथ-साथ साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, डिजिटल लत, ऑनलाइन ठगी और व्यक्तिगत गोपनीयता के दुरुपयोग जैसे जोखिमों से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य, परिवार, स्कूल और समुदाय के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है।

सरकार ने कहा है कि बाल संरक्षण को केवल बचाव और राहत तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोसामाजिक सहयोग, पारिवारिक पुनर्मिलन और पुनर्वास तक जोड़कर एक एकीकृत बाल संरक्षण प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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