संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले अमेरिका-फिलिस्तीन तनाव बढ़ा, वीजा प्रतिबंधों का ऐलान

युगवार्ता    17-Sep-2026
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सांकेतिक


वॉशिंगटन , 17 सितंबर (हि.स.)। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की शुरुआत से कुछ दिन पहले अमेरिका ने फिलिस्तीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को कहा कि फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के सदस्यों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी (पीए) के अधिकारियों के लिए वीजा प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखा जाएगा।

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू

के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने कांग्रेस को बताया कि पीएलओ और पीए अमेरिकी कानूनों के तहत किए गए अपने वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में फिर से विफल रहे हैं। विभाग ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी पक्ष की कई कार्रवाइयों का हवाला दिया।

अमेरिका ने विशेष रूप से इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के माध्यम से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक ले जाने की कोशिशों का उल्लेख किया।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, फिलिस्तीनी पक्ष की ओर से फिलिस्तीनी राज्य को एकतरफा अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के प्रयास भी बातचीत की प्रक्रिया को दरकिनार करने की कोशिश के तौर पर देखे जा रहे हैं।

अमेरिका ने पीएलओ और पीए पर आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के भी आरोप लगाए हैं।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में शुरू होने वाला है। पिछले साल भी अमेरिका ने महासभा से पहले पीएलओ और पीए के अधिकारियों के वीजा को मंजूरी देने से इनकार किया था या कुछ वीजा रद्द किए थे।

हालांकि, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के तहत न्यूयॉर्क स्थित फिलिस्तीनी मिशन को कुछ विशेष छूट प्राप्त है।

पिछले साल फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास व्यक्तिगत रूप से महासभा में शामिल नहीं हो सके थे और उन्होंने वीडियो लिंक के जरिए सभा को संबोधित किया था।

अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्टी प्रवक्ता पालोमा चाकॉन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन हर वीजा फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा निर्णय मानता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के तौर पर अमेरिका अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेता है, लेकिन वीजा आवेदकों की जांच और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा।

चाकॉन के मुताबिक, महासभा में शामिल होने वाले प्रतिनिधिमंडलों को वीजा आवेदन से जुड़ी आवश्यकताओं के बारे में पहले ही जानकारी दी गई थी। यदि कोई आवेदक सुरक्षा जांच के मानकों या अन्य निर्धारित दिशानिर्देशों को पूरा नहीं करता है, तो उसका वीजा अस्वीकार किया जा सकता है।

अमेरिका की घोषणा पर फिलिस्तीनी अथॉरिटी या पीएलओ की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि राष्ट्रपति महमूद अब्बास और आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने वाले फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य के वीजा आवेदन पर क्या फैसला लिया गया है।

अमेरिकी विदेश विभाग का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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