
बीकानेर, 18 सितंबर (हि.स.)। बदलती जलवायुवीय परिस्थितियों के बीच अफ्रीकी देशों में खाद्य सुरक्षा की संभावनाएं तलाशने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने थार के शुष्क क्षेत्रों में होने वाली मूंग, मोठ और अन्य दलहनी फसलों के अनुसंधान एवं जर्मप्लाज्म के बारे में जानकारी ली।
यूनाइटेड किंगडम के किर्क हाउस ट्रस्ट और विश्वविद्यालय के बीच हुए एमओयू के तहत प्रतिनिधिमंडल दो दिवसीय दौरे पर राजस्थान आया है। अनुसंधान निदेशक डॉ. एनके शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को विश्वविद्यालय के कृषि अनुसंधान, मोठ-मूंग सहित अन्य दलहनी फसलों और जर्मप्लाज्म से जुड़े कार्यों की जानकारी दी।
किर्क हाउस ट्रस्ट के एसटीओएल कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. पीएन माथुर ने कहा कि अफ्रीका के शुष्क क्षेत्रों में दलहनी फसलों की खेती सीमित है। जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों के सामने नई चुनौतियां हैं। ऐसे में मोठ और मूंग बीन जर्मप्लाज्म साझा करने से खाद्य सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं।
व्यवसायी आशीष अग्रवाल ने कहा कि बीकानेरी भुजिया ने बीकानेर को वैश्विक पहचान दिलाई और इससे रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि मारामा बीन पर हो रहा अनुसंधान किसानों और उद्यमियों के लिए उपयोगी हो सकता है। उद्यमी दीपक अग्रवाल ने कहा कि दाल आधारित प्रसंस्करण उद्योग पोषण सुरक्षा के साथ रोजगार और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मददगार है।
किर्क हाउस ट्रस्ट की सीईओ डॉ. क्लोडिया कैनल होलजैइस ने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त किया। डॉ. भूपेंद्र सिंह शेखावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रगतिशील किसान बलजीत सिंह बिश्नोई, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन, सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय के डॉ. वीर सिंह, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विजय प्रकाश, डीन पीजी डॉ. राजेश वर्मा सहित अन्य वैज्ञानिक मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल में यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त राज्य अमेरिका, नामीबिया, स्विट्जरलैंड और मेडागास्कर सहित अन्य देशों के कृषि अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी शामिल रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव