सुरेंद्र कोली की मौत पर निठारी कांड की पीड़िता के पिता ने उठाए सवाल

युगवार्ता    18-Sep-2026
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खंडहर बनी खूनी कोठी डी-5 और मृतका ज्योति के माता-पिता


-पीड़िता के पिता का आरोप- कोली की हत्या हुई, पुलिस ने प्रथमदृष्टया आत्महत्या बताया

नोएडा, 18 सितंबर (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय से निठारी कांड से जुड़े सभी मामलों में बरी होने के बाद जेल से रिहा हुए सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में हुई मौत को लेकर एक पीड़ित परिवार ने सवाल उठाए हैं। निठारी कांड में मारी गई किशोरी ज्योति के पिता झब्बू लाल ने दावा किया है कि कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपित मोनिंदर सिंह पंढेर ने सच सामने आने से रोकने के लिए कोली की हत्या कराई।

हालांकि, हरिद्वार पुलिस के अनुसार, कोली सप्त सरोवर रोड स्थित एक चाय की दुकान पर फंदे से लटका मिला। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच की है और पुलिस के मुताबिक प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। शव को कब्जे में लेकर पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है। मौत के वास्तविक कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

मृतक ज्योति के पिता झब्बू लाल (64) ने कहा कि सुरेंद्र कोली की हत्या की गई है और उसने आत्महत्या नहीं की। उनकी बेटी ज्योति भी वर्ष 2006 में निठारी से लापता हुए बच्चों में शामिल थी।

झब्बू लाल ने सवाल उठाया कि यदि कोली मानसिक तनाव में था तो उसने जेल में रहते हुए आत्महत्या क्यों नहीं की और रिहाई के कई महीने बाद ऐसा कदम क्यों उठाया। उन्होंने कहा कि कोली के पास मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती थी और इसी वजह से उसकी हत्या किए जाने का उन्हें संदेह है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी हत्या की पुष्टि नहीं की गई है।

झब्बू लाल ने यह भी दावा किया कि निठारी मामले में कोली मुख्य गुनहगार नहीं था और उसके नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर को मुख्य आरोपित बताया। उन्होंने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि परिवार लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।

झब्बू लाल और उनकी पत्नी सुनीता (61) मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले हैं। करीब चार दशक पहले वे काम की तलाश में निठारी आए थे। लाल स्थानीय लोगों के कपड़े प्रेस कर परिवार का गुजारा करते हैं। उन्होंने सरकार से परिवार की मदद करने की अपील करते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग के बिना उनके लिए आगे भी न्याय की लड़ाई जारी रखना मुश्किल है।

2006 में सामने आया था निठारी कांड

नोएडा के सेक्टर-31 स्थित पंढेर की डी-5 कोठी के पास वर्ष 2006 में नाले और परिसर के पीछे से कंकाल, खोपड़ियां और मानव अवशेष मिलने के बाद निठारी कांड सामने आया था। इसके बाद बच्चों और युवतियों के लापता होने तथा हत्या के कई मामले सामने आए थे। घटना के बाद पूरे देश में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था।

वर्ष 2006 में गिरफ्तारी के समय करीब 30 वर्षीय सुरेंद्र कोली को निठारी कांड से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था और उसे मृत्युदंड सुनाया गया था। हालांकि, बाद में वह मामले से जुड़े सभी 13 मामलों में बरी कर दिया गया। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2025 में अंतिम बचे मामले में भी उसे बरी कर दिया था।

15 वर्षीय किशोरी के कथित दुष्कर्म और हत्या से जुड़े अंतिम मामले में क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आपराधिक कानून केवल अनुमान के आधार पर सजा की अनुमति नहीं देता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि गंभीर संदेह भी ठोस साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता और अपराधी की पहचान आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप स्थापित नहीं हुई थी।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद कोली को नोएडा की लुक्सर जेल से रिहा कर दिया गया था। रिहाई के बाद वह हरिद्वार चला गया और वहां कुछ समय से रह रहा था तथा चाय की दुकान चला रहा था। फिलहाल हरिद्वार पुलिस उसकी मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है।-----------

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

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