महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अल्ट्रा लाइट होवित्जर ने सटीक फायर पावर दिखाई

युगवार्ता    20-Sep-2026
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राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में


- लड़ाई की तैयारी दिखाते हुए सभी तय लक्ष्यों पर कामयाबी से निशाना साधा

नई दिल्ली, 20 सितंबर (हि.स.)। भारत और अमेरिका के बीच उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास 'युद्ध अभ्यास' के दौरान दोनों सेनाएं अपनी-अपनी युद्धक क्षमताएं दिखा रही हैं। इसी क्रम में भारतीय एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर (यूएलएच) से लाइव फायरिंग की गई, जिसमें पेशेवर और सटीकता के साथ लड़ाई की तैयारी दिखाते हुए सभी तय लक्ष्यों पर कामयाबी से निशाना साधा गया। फायरिंग के बाद अमेरिकी टुकड़ी ने गन पोजिशन का दौरा किया और यूएलएच बैटरी के अधिकारियों और सैनिकों से बातचीत की।

उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 'युद्ध अभ्यास' का 22वां संस्करण 9 सितंबर से चल रहा है, जो 28 सितंबर तक चलेगा इसमें दोनों देशों की सेनाओं से 600-600 (कुल 1200) सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास की मुख्य फोकस उच्च पर्वतीय युद्धकला, आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन, ड्रोन-रोधी क्षमताएं, रोबोटिक डॉग्स और आधुनिक तकनीक का समन्वय करना है। साथ ही दोनों सेनाओं के बीच परिचालन अंतर-संचालनीयता और सामरिक तालमेल को मजबूत करना है।

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इसी 'युद्ध अभ्यास' के दौरान एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर से लाइव फायरिंग की गई, जिसमें डायरेक्ट फायरिंग तरीके का इस्तेमाल करके लाइन ऑफ साइट पर मौजूद टारगेट पर निशाना साधा गया। यूएलएच गन क्रू ने बहुत अच्छा प्रोफेशनलिज्म, सटीकता और लड़ाई की तैयारी दिखाई और सभी तय टारगेट पर कामयाबी से निशाना साधकर उन्हें खत्म कर दिया। फायरिंग के बाद अमेरिकी टुकड़ी ने गन पोजिशन का दौरा किया और यूएलएच बैटरी के अधिकारियों और सैनिकों से बातचीत की, जिससे प्रोफेशनल जानकारी का आदान-प्रदान हुआ।

एक्सरसाइज 'युद्ध अभ्यास' भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है, जो वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। यह शांति स्थापना और विद्रोह-विरोधी प्रशिक्षण से विकसित होकर अब उच्च पर्वतीय युद्ध कला, हाइब्रिड खतरों, मानवीय सहायता तथा आपदा राहत एवं बहु-डोमेन संचालन को शामिल करता है।

इस अभ्यास में अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीज़न (फोर्ट वेनराइट, अलास्का) के आर्कटिक-प्रशिक्षित सैनिक और तीसरी बहु-डोमेन टास्क फोर्स शामिल हैं, जो सटीक गोलाबारी और एकीकृत कमान-एवं-नियंत्रण प्रणालियों में विशेषज्ञ हैं। इन अभ्यासों में एक कमांड पोस्ट एक्सरसाइज और एक फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज शामिल हैं, जिसका समापन रॉकेट सिस्टम तथा लंबी दूरी की सटीक गोलाबारी से जुड़े एक संयुक्त लाइव-फायर प्रदर्शन के साथ होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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