सरदार तेजा सिंह समुंदरी गुरुद्वारा सुधार आंदोलन के एक दूरदर्शी नेता थे : तरनजीत सिंह संधू

युगवार्ता    21-Sep-2026
Total Views |
द्वारका के गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा मेंअपने दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी की शहादत की 100वीं बरसी उनको नमन करते हुए


गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सेवा और लंगर में  संगत की सेवा करते  दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत  सिंह संधू


नई दिल्ली, 21 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को अपने दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी की शहादत की 100वीं बरसी (शताब्दी वर्ष) के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। द्वारका स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में आयोजित इस आयोजन में भारतीय जनता पार्टी की सांसद कमलजीत सहरावत और विधायक संदीप सहरावत मौजूद रहे।

उपराज्यपाल ने कहा कि उनके दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी गुरुद्वारा सुधार आंदोलन के एक दूरदर्शी नेता रहे और उन्होंने अपना जीवन गुरुद्वारा सुधार, शिक्षा, समानता और भारत की आजादी की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

उपराज्यपाल ने कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान ईमानदारी, अहिंसक संघर्ष और निस्वार्थ सेवा का एक कालजयी प्रतीक है - एक ऐसी अमूल्य विरासत जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उप राज्यपाल गुरुद्वारा में सेवा भी की और लंगर भी छका।

उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश सरकार ने 1913-1914 में जब दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब की चारदीवारी का एक हिस्सा गिरा दिया, तब सरदार तेजा सिंह समुंदरी उसके पुनर्निर्माण के आंदोलन में अग्रणी भूमिका में शामिल हुए। चारदीवारी का पुनर्निर्माण अनुशासित और अहिंसक आंदोलन की सफलता का प्रतीक बना। सन् 1925 में ‘सिख गुरुद्वारा अधिनियम’ के माध्यम से प्रमुख गुरुद्वारों का प्रबंधन भले ही संगत को सौंप दिया गया था, लेकिन तब भी अकाली आंदोलन और एसजीपीसी के कई बड़े नेता जेल में बंद थे। उनकी रिहाई के बदले ब्रिटिश सरकार लिखित आश्वासन चाहती थी कि वे आगे किसी आंदोलन में भाग नहीं लेंगे। तब सरदार तेजा सिंह समुंदरी ने सशर्त रिहाई को ठुकराते हुए जेल में ही रहना स्वीकार किया और 44 वर्ष की आयु में सन् 1926 में लाहौर सेंट्रल जेल में शहादत प्राप्त की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

Tags