समानुभूति से ही साकार होगा अंत्योदय का संकल्प : कश्मीरी लाल

युगवार्ता    25-Sep-2026
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संबोधित करते अतिथि


कार्यक्रम में सम्मानित होते अभय महाजन


- बुवि में ‘विकास चेतना पर्व एवं सम्मान समारोह 2026 : अभय महाजन को मिला ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा सम्मान

झांसी, 25 सितंबर (हि.स.)। पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एवं स्वदेशी जागरण मंच, कानपुर प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर गांधी सभागार में आयोजित ‘विकास चेतना पर्व एवं सम्मान समारोह 2026’ में स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सही अर्थों में समझने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा के प्रति संकल्पित होना होगा। इसके लिए केवल सहानुभूति से आगे बढ़कर समानुभूति को अपनाना होगा, तभी अंत्योदय की अवधारणा साकार हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकरण और स्वदेशी के दो मंत्र भारत को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने की। समारोह में दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट के संगठन सचिव अभय महाजन को ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि कश्मीरी लाल ने युवाओं से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन एकाग्रता, समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ संकल्प का उदाहरण रहा।

उन्होंने एकात्म मानववाद की चर्चा करते हुए कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने इसे व्यापक रूप में एकात्म मानव दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए व्यक्ति को छोटे से छोटा कार्य करने के लिए भी सदैव तत्पर रहना चाहिए।

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए मजबूत अर्थव्यवस्था आवश्यक है। इसके लिए प्रचुर उत्पादन, समान वितरण और उपभोग में संयम की भावना आवश्यक है। उन्होंने स्वावलंबन और उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्वदेशी उद्यमियों और नेतृत्व को तैयार करने पर बल दिया।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अभय महाजन ने बुंदेलखंड की धरती को नमन करते हुए विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान व्यक्तिगत रूप से उनका नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न नानाजी देशमुख के विचारों एवं कार्यों का सम्मान है।

अभय महाजन ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय युगानुकूल सामाजिक परिवर्तन की दिशा में सोचने और कार्य करने के लिए संकल्पित रहे। भारतीय संस्कृति देने की संस्कृति है और जनता की सहभागिता तथा उद्यमिता के पुरुषार्थ से ही स्वावलंबी एवं स्वाभिमानी समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय मानव को ईश्वर की सर्वोच्च कृति मानते थे और उनके दर्शन को नानाजी देशमुख ने धरातल पर उतारने का कार्य किया।

चित्रकूट में हाल में आई विनाशकारी बाढ़ का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति से उतना ही लेना चाहिए जितनी आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि भारत तलवार के बल पर नहीं, बल्कि ज्ञान के बल पर विश्वगुरु बना था और ज्ञान, संस्कृति तथा मानवीय मूल्यों के माध्यम से भविष्य में भी विश्व में अपनी प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करेगा।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन मनुष्य के समग्र विकास का संदेश देता है। इसमें मन, शरीर, बुद्धि और आत्मा को एक इकाई के रूप में देखते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक समग्र विकास पहुंचाने की संकल्पना निहित है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर हम सभी को सेवा के भाव को और विस्तार देने की आवश्यकता है।

कुलपति ने कहा कि हमारा विचार सेवा का और सोच स्वदेशी की होनी चाहिए। उन्होंने स्वदेशी की अवधारणा को वर्तमान समय के अनुरूप समग्रता में समझने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि स्वदेशी का अर्थ केवल देश में बने उत्पाद तक सीमित नहीं है। नई सोच, देश को सशक्त बनाने और अपनी संस्कृति को मजबूती प्रदान करने वाला विचार भी स्वदेशी की व्यापक अवधारणा का हिस्सा है।

इससे पूर्व कार्यक्रम के संयोजक एवं मंच संचालक प्रो. मुन्ना तिवारी ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों का परिचय कराया।

इस अवसर पर अतिथियों का सम्मान किया गया तथा अभय महाजन को ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा सम्मान’ प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने देश में स्वदेशी जागरण के लिए शपथ ली। आभार स्वदेशी जागरण मंच के सुदीप खरे ने व्यक्त किया।

कार्यक्रम में कुलानुशासक प्रो. विनीत कुमार, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. राघवेन्द्र दीक्षित, अतीत विजय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. विजय यादव, डॉ दीप्ति सिंह, डॉ सुमिरन श्रीवास्तव, डॉ शुभांगी निगम, स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संघटक विवेक कुमार, प्रांत संयोजक सुदीप खरे जी, प्रांत समन्वयक प्रवीण अग्निहोत्री, राकेश कुशवाहा,कोमल तिवारी,नरेंद्र शिवहरे,स्वनिल मोदी, ज्योत्स्ना कश्यप तथा डॉ विजय यादव, डॉ प्रशांत मिश्रा, डॉ संतोष पाण्डेय, डॉ श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ विपिन प्रसाद, डॉ आशीष दीक्षित, राघवेंद्र द्विवेदी, डॉ ऋचा गरिमा ,जोगेन्द्र कुमार ,आशुतोष शर्मा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आयोजन पं. दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ, स्वदेशी जागरण मंच कानपुर प्रांत, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमेनिटीज एंड अप्लाइड सोशल साइंसेज, विधि संस्थान, फोरेंसिक विज्ञान विभाग तथा ललित कला संस्थान, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया

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