उत्तराखंड: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे ट्रैकर्स के रेस्क्यू के लिए सोमवार से हवाई अभियान

युगवार्ता    27-Sep-2026
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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर मौसम से उत्पन्न स्थिति और बचाव अभियान की समीक्षा करते।


-मौसम देखकर संचालित होगी चारधाम यात्रा, बारिश और भूस्खलन पर 24 घंटे निगरानी

देहरादून, 27 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में बारिश और मौसम विभाग के रेड और ऑरेंज अलर्ट के बीच प्रशासन ने आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है। उत्तरकाशी और बागेश्वर के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे 136 ट्रैकर्स को निकालने के लिए सोमवार सुबह छह बजे से हेलीकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर मौसम से उत्पन्न स्थिति और बचाव अभियान की समीक्षा की। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार, उत्तरकाशी जनपद में 10 ट्रेकिंग दलों के 136 ट्रेकर्स और कुल 13 फंसे हुए हैं। सभी ट्रैकर्स की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित जनपदों में रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया है।

बागेश्वर जिले में ट्रैकिंग पर गए तीन दलों के 43 ट्रेकर्स को मौसम खराब होने के कारण प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया है। जिला प्रशासन के अनुसार, ट्रैकर्स फंसे हुए नहीं हैं और सभी सुरक्षित हैं। प्रशासन मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। मौसम अनुकूल होने के बाद ट्रैकर्स को आगे रवाना करने का निर्णय लिया जाएगा।

मुख्य सचिव ने यूकाडा को पर्याप्त हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने रेस्क्यू के दौरान ट्रैकर्स से लगातार संपर्क बनाए रखने, उनकी लोकेशन और स्वास्थ्य की निगरानी करने और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा।

उन्होंने प्रत्येक रेस्क्यू हेलीकॉप्टर में सेटेलाइट फोन और पर्याप्त एटीएफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रेस्क्यू के बाद सभी ट्रैकर्स की मेडिकल स्क्रीनिंग कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को अलर्ट मोड पर रखने को कहा गया है।

मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी और बागेश्वर के जिलाधिकारियों को पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, सेना, आईटीबीपी, यूकाडा और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर अभियान चलाने के निर्देश दिए। एसईओसी को रेस्क्यू अभियान की 24×7 निगरानी करने और दोनों जिलों से लगातार स्थिति की जानकारी लेने को कहा गया है।

मौसम विभाग के रेड और ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर मुख्य सचिव ने राज्यभर में अधिकारियों को 24×7 अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, विद्युत-पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था और राहत-बचाव कार्यों की लगातार निगरानी करने को कहा।

उन्होंने जिलाधिकारियों को बारिश और अतिवृष्टि से हुए नुकसान का आकलन कर उसकी सूचना राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्स्थापना कार्य तेज किए जा सकें।

संवेदनशील और भूस्खलन संभावित मार्गों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनों और अन्य आवश्यक उपकरणों की पहले से तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने तथा बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की बहाली को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।

मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा को मौसम और मार्ग की वास्तविक स्थिति के आधार पर संचालित करने के निर्देश दिए। अत्यधिक बारिश या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही आगे भेजने को कहा गया है।

उन्होंने नदी तटीय क्षेत्रों में चौबीस घंटे जलस्तर की निगरानी और खतरे की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए। डैम और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पूर्व सूचना देकर लोगों को सतर्क करने को भी कहा गया है।

मुख्य सचिव ने संवेदनशील क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और गंभीर रोगियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों या चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचाने और जरूरत के अनुसार हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने को कहा गया है।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को 15 अक्टूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अभियान पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों की नियमित निगरानी करने और संवेदनशील मार्गों पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही, मरम्मत एवं पुनर्स्थापना कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बारिश के बीच डेंगू की रोकथाम के लिए भी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों को जलभराव वाले स्थानों की पहचान, जल निकासी, फॉगिंग और एंटी लार्वा अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

भूस्खलन के बीच एसडीआरएफ ने रोप से 500 यात्रियों को सुरक्षित निकाला-

पिथौरागढ़ जिले में भूस्खलन के कारण बाधित मार्ग पर एसडीआरएफ ने रोप के जरिए सुरक्षित आवाजाही कराते हुए करीब 500 यात्रियों को सड़क के दूसरी ओर सकुशल पहुंचाया। बाद में मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया गया और आवागमन सामान्य हो गया।

एसडीआरएफ के अनुसार, मुन्ना बैंड के पास भूस्खलन के चलते सड़क मार्ग बाधित हो गया था। सूचना मिलने पर उपनिरीक्षक डूंगर सिंह अधिकारी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने विषम परिस्थितियों में रोप के माध्यम से सुरक्षित रास्ता तैयार किया। टीम ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें सावधानीपूर्वक मार्ग के दूसरी ओर पहुंचाया। एसडीआरएफ के प्रयास से करीब 500 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। बाद में सड़क मार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया और वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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