
इंदौर, 28 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई 36 मौतों के मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने का रास्ता साफ हो गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई दौरान के दौरान जांच रिपोर्ट को ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की 600 पन्नों की जांच रिपोर्ट करीब एक माह पहले उच्च न्यायालय में पेश की जा चुकी थी। जांच रिपोर्ट में भागीरथपुरा कांड के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय किए जाने के साथ ही ड्रेनेज लाइन में हुए कथित घोटाले का भी उल्लेख किया गया है।
उच्च न्यायालय के रिपोर्ट पेश होने के बाद इसे सार्वजनिक करने और इसकी प्रति उपलब्ध कराने को लेकर याचिकाकर्ताओं की ओर से मांग की गई थी। मामले की जांच रिपोर्ट लंबे समय से गोपनीय रखी गई थी। सोमवार को इंदौर उच्च न्यायालय ने करीब 600 पन्नों की जांच रिपोर्ट को वेबसाइट पर अपलोड करने की अनुमति दे दी। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में रिपोर्ट स्कैन कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके साथ ही रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर लगी रोक भी हट गई है।
600 पन्नों की रिपोर्ट पर होना है फैसला
भागीरथपुरा मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय ने जनवरी में एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। आयोग ने अपनी जांच पूरी कर करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने की मांग के बाद न्यायालय ने फिलहाल इसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाई थी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकीलों को रजिस्ट्रार के समक्ष रिपोर्ट देखने और उसमें दर्ज बिंदुओं को नोट करने की अनुमति दी गई थी।
रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी
रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग को लेकर एडवोकेट मनीष यादव और एडवोकेट रितेश इनानी के माध्यम से इंटरविनर याचिका दायर की गई है। इसी मांग को लेकर कोर्ट में आवेदन पर सुनवाई हुई। मामले में कुल सात जनहित याचिकाएं दायर हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर