मप्र के उज्जैन में शाही मस्जिद तोड़ने के खिलाफ दायर याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज

युगवार्ता    28-Sep-2026
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इंदौर हाईकोर्ट (भवन की तस्वीर)


उज्जैन में पथराव के बीच आंसू गैस छोड़ते हुए पुलिस


उज्जैन की शाही मस्जिद


उज्जैन, 28 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ प्रोजेक्ट के लिए सड़क चौड़ीकरण की जद में आई शाही मस्जिद के एक हिस्से को तोड़े जाने के विरोध में दायर याचिका को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर याचिका का निराकरण कर दिया।

मामले में विवादित निर्माण के करीब साढ़े 9 फीट हिस्से को हटाने की मांग की गई थी। इस निर्माण को लेकर विवाद सामने आने के बाद संबंधित पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सोमवार को न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लैई की युगलपीठ में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई। पक्षकारों ने न्यायालय के समक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान करने का प्रस्ताव रखा। चर्चा के बाद दोनों पक्ष एक समझौते पर पहुंचे। समझौते के तहत करीब तीन फीट विवादित हिस्से को हटाने और एक दुकान को तोड़े जाने पर सहमति बनी।

याचिकाकर्ता शाही मस्जिद कमेटी के अधिवक्ता कुलदीप पाठक ने बताया कि कमेटी और प्रशासन के बीच समझौते के तहत सड़क के लिए 3 फीट जगह के साथ कुछ दुकानें हटाने पर सहमति बनी है। बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा। दुकानों के लिए दूसरी जगह दी जाएगी। जब तक समझौते का पूरा ब्योरा अदालत के रिकॉर्ड पर नहीं आ जाता, तब तक काम रोका जाए। समझौते में जिन शर्तों पर सहमति हुई है, उन्हें पूरा किया जाए।

इसके जवाब में दूसरे पक्ष जिला प्रशासन की ओर से दलील दी गई कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। दो वीडियो हैं, जिनमें मस्जिद प्रशासन खुद स्ट्रक्चर हटाता दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि सम्मान के कारण हम इसे नहीं हटा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि शहर काजी का वीडियो भी यही कहता है कि समझौता हो गया है। जिस विवादित पक्ष की बात कही जा रही है, उसका फैसला वक्फ बोर्ड को करना है। इस मामले में उनका कोई अधिकार नहीं है। अदालत ने भी इस पर कोई फैसला नहीं दिया था। मस्जिद के कुछ हिस्सों को हटाने पर समिति खुद ही कार्रवाई कर रही है।

याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि समझौता हो चुका है, लेकिन इसकी जानकारी न्यायालय के पास नहीं है। नगर निगम ने अपने जवाब और नोटिस में जो शर्तें मानने का भरोसा दिया है, उन्हें मानना ही होगा। इसके साथ ही न्यायालय ने जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले को डिस्पोज ऑफ कर दिया।

गौरतलब है कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी के तहत सड़क में बाधक निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम द्वारा की जा रही है। शाही मस्जिद के एक हिस्से को तोड़े जाने का विवाद भी इसी कार्रवाई के तहत विवाद सामने आया है। इस मामले में 9 सितंबर को एक याचिका दायर की गई थी, जिसे मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से रिट अपील दायर की गई थी, जिस पर सोमवार को भोजनावकाश के बाद उच्च न्यायालय की युगलपीठ में सुनवाई हुई।

इधर, उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम खबर लिखे जाने तक जारी था। मुस्लिम समाज के लोग खुद मस्जिद के उस हिस्से को हटा रहे हैं, जो सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आ रहा है। उज्जैन में कमरी रोड इलाके में सड़क पर पड़े छोटे-बड़े पत्थरों को नगर निगम कर्मचारी हटा रहे हैं। शाही मस्जिद के हिस्से हटाने की कार्रवाई के बीच शाम करीब चार बजे ईओडब्ल्यू के डीजी उपेंद्र जैन मौके पर पहुंचे। उन्होंने आईजी राकेश गुप्ता और एसपी प्रदीप शर्मा से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली।

भोपाल में भी पुलिस अलर्ट, सोशल मीडिया पर निगरानी

उज्जैन में पथराव-हंगामे के चलते भोपाल में भी पुलिस अलर्ट मोड पर है। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में फोर्स तैनात की गई है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सभी थानों को अलर्ट रखा गया है। पुलिस अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सोशल मीडिया पर भी निगरानी है। आपत्तिजनक या भ्रामक पोस्ट करने वालों पर नजर रखी जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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