सब्सक्रिप्शन के लिए खुला शाह इनवेस्टर्स होम का आईपीओ, 6 अक्टूबर को लिस्टिंग संभव

युगवार्ता    28-Sep-2026
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प्रतीकात्मक


नई दिल्ली, 28 सितंबर (हि.स.)। फाइनेंशियल सर्विस और रिटेल स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी शाह इनवेस्टर्स होम लिमिटेड का 90.17 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 30 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद एक अक्टूबर को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि पांच सितंबर को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर छह अक्टूबर को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट हो सकते हैं। लॉन्चिंग के बाद दोपहर दो बजे तक यह आईपीओ 24 प्रतिशत सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 159 रुपये से लेकर 167 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 85 शेयर का है। इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स कम से कम एक लॉट यानी 85 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, जिसके लिए उन्हें 14,195 रुपये का निवेश करना होगा। इसी तरह रिटेल इनवेस्टर 1,98,730 रुपये के निवेश से अधिकतम 14 लॉट में 1,190 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 53,99,200 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं।

इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 प्रतिशत हिस्सा और नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए बीलाइन कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि एमयूजीएफ इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है।

शाह इनवेस्टर्स होम की वित्तीय स्थिति की बात करें, तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में उतार-चढ़ाव होता रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 18.05 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 23.42 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का शुद्ध लाभ घट कर 13.11 करोड़ रुपये रह गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 79.05 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 94.47 करोड़ रुपये और 2025-26 में फिसल कर 70.40 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 3.54 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 5.71 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ और तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ कर 18.47 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 134.79 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 152.34 करोड़ रुपये के स्तर पर और 2025-26 में 163.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 150.54 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 168.09 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 179.71 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 25.13 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 35.31 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कम होकर 21.62 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक

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