
नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार की समीक्षा करने के बजाय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है।
मंगलवार को भाजपा केन्द्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए
स्मृति ईरानी ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों के नाम, डुप्लीकेट नाम और अन्य संदिग्ध प्रविष्टियों के सत्यापन की प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है।
‘मृत और डुप्लीकेट नामों को लेकर कांग्रेस क्यों परेशान?’
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची में किसी मृत व्यक्ति का नाम दर्ज है या किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थान पर दर्ज है, तो ऐसे मामलों की जांच और सुधार पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन मामलों में सत्यापन की जरूरत है, वहां बूथ लेवल अधिकारी दस्तावेज जुटाकर संबंधित मतदाता की स्थिति की पुष्टि करेंगे।
ईरानी ने दावा किया कि चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया को लेकर पहले ही स्पष्टीकरण दे चुका है।
13 करोड़ 30 लाख नामों का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इन नामों से जुड़े सवालों पर स्पष्टीकरण दिया है और डुप्लीकेट या मृत व्यक्तियों के नामों की जांच दस्तावेजों के आधार पर की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राहुल गांधी के 2019 के बयान का जिक्र
करते हुए स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को निशाना बनाने की राजनीति कर रहा है और अब उसके हमले संवैधानिक संस्थाओं तक पहुंच गए हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाते समय संस्थागत व्यवस्था की गरिमा और विश्वसनीयता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय महामंत्री ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि पार्टी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर आपत्ति है, तो क्या वह उन राज्यों में भी आयोग पर सवाल उठा रही है, जहां भाजपा की सरकार नहीं है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से पूछा कि इन राज्यों में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उसका क्या रुख है। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के इतिहास और उसके गठन से जुड़े ए.ओ. ह्यूम के संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इतिहास के पन्ने खोलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा कर रही है, तो उसे अपने संगठन के गठन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों पर भी चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस के गठन को ब्रिटिश शासन के ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए पार्टी पर राजनीतिक हमला किया। कांग्रेस के गठन और ए.ओ. ह्यूम की भूमिका को लेकर इतिहास में विभिन्न व्याख्याएं मौजूद रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी