
नई दिल्ली, 29 सितंबर (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अन्नदाता हित सर्वोपरि है। देश के हर नीतिगत फैसले और अंतरराष्ट्रीय समझौतों में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्हाेंने कहा कि देश की कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्हाेंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को मंच पर ही 1200 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय स्वीकृति पत्र प्रदान किए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज दिल्ली स्थित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सी. सुब्रमण्यम सभागार, पूसा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन रबी अभियान-2026 के दूसरे दिन मंगलवार काे विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों काे संबाेधित कर रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि सरकारें और पार्टियां आती-जाती रहती हैं, पार्टियां बनती और बिगड़ती हैं, लेकिन देश और किसान शाश्वत हैं। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर 'टीम एग्रीकल्चर' की भावना से काम करना होगा। इस मंच पर कोई राजनीति नहीं है, बल्कि लक्ष्य सिर्फ यह है कि खेती कैसे बेहतर हो और किसान कैसे आगे बढ़े।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने मंच से ही पीएम-आरकेवीवाई के अंतर्गत पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपये, हरियाणा को 198 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपये, बिहार को 114 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपये, मिजोरम को 75 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपये, झारखंड को 58 करोड़ रुपये और पंजाब को 43 करोड़ रुपये के स्वीकृति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधन भी उपलब्ध करा रही है ताकि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर तुरंत शुरू हो सके।
देश की कृषि उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के बाद देश की कृषि विकास दर 3 प्रतिशत से बढ़कर 4.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन में औसत बढ़ोतरी पहले के 40 लाख टन के मुकाबले अब दोगुनी से अधिक होकर 84 लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दो वर्षों में ही रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन का अभूतपूर्व इजाफा दर्ज किया गया है। उन्होंने इस ऐतिहासिक वृद्धि का श्रेय राज्यों के कृषि विभागों, वैज्ञानिकों और अन्नदाताओं के साझा परिश्रम को दिया।
सहकारी संघवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नई कार्यप्रणाली की घोषणा करते हुए शिवराज सिंह ने कहा कि केंद्र में होने वाली साप्ताहिक समीक्षा की तर्ज पर अब हर महीने राज्यों के साथ नियमित वर्चुअल समीक्षा बैठकें की जाएंगी, जिसमें प्रगति की निरंतर समीक्षा होगी। राज्य स्तर पर कृषि मंत्री, कृषि सचिव, राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, केवीके, आत्मा, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, प्रोसेसर्स, एक्सपोर्टर्स और भारत सरकार के नोडल अधिकारियों को जोड़कर एक सशक्त राज्य कृषि टीम बनाई जाएगी। वहीं, जिला स्तर पर कलेक्टर, डीडीए, आत्मा, केवीके, आईसीएआर वैज्ञानिकों, बैंकर्स और किसानों की मासिक बैठकें होंगी।
कृषि अभियानों की पूर्व तैयारी के लिए इंटरफेस बैठकों का वार्षिक कैलेंडर तय करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि हर साल खरीफ के लिए 10 मई को जिला स्तरीय और 17 मई को राज्य स्तरीय बैठक होगी। इसी प्रकार रबी अभियान के लिए 10 सितंबर को जिला स्तरीय और 17 सितंबर को राज्य स्तरीय बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही, देश भर में एक ही दिन एकदिवसीय विशेष बैठक भी होगी, जिसमें पूरे देश में एक साथ कृषि मंत्री, अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक किसानों के हित में जुड़ेंगे।
मिट्टी के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर केंद्रीय मंत्री ने इस साल 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक पूरे देश में व्यापक 'खेत बचाओ अभियान' चलाने का आह्वान किया। इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों सहित सभी प्रमुख स्टेकहोल्डर्स सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। अभियान में सॉइल हेल्थ कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया जाएगा ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति और मित्र कीट सुरक्षित रहें।
इस साल की रबी तैयारियों के तहत उन्होंने मिट्टी में नमी और पानी की उपलब्धता के आधार पर ही फसलों और उन्नत बीजों की बुवाई की सलाह देने पर बल दिया। उन्होंने फसलों को बीमारियों व कीटों से बचाने की पुख्ता व्यवस्था करने, सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संतृप्त करने और फसल बीमा योजना के अंतर्गत पारदर्शी क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट कराने के निर्देश दिए।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का सही और लाभकारी दाम दिलाने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। इसमें पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण (वेयरहाउसिंग) और बिक्री की सुदृढ़ व्यवस्था शामिल है। उन्होंने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर की एमएसपी पर 100 फीसद सुनिश्चित सरकारी खरीद की जाएगी और 48 घंटे में भुगतान की व्यवस्था होगी।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट सहित केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न कृषि संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / रामानुज शर्मा