
नई दिल्ली, 30 सितंबर (हि.स.)। टाटा संस में बोर्डरूम का विवाद अब महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर तक पहुंच गया है। टाटा संस के नामित निदेशक एवं ट्रस्टी वेनु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट के कामकाज की नियामक जांच की मांग की है।
सूत्रों ने बुधवार को बताया कि टाटा समूह में छिड़े नेतृत्व विवाद के बीच टाटा संस के नामित निदेशक एवं ट्रस्टी वेनु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) के संचालन और प्रशासन को लेकर महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर से नियामकीय जांच की मांग की है।
श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में एसडीटीटी के स्थायी ट्रस्टी के रूप में नोएल एन. टाटा की नियुक्ति एवं मौजूदा स्थिति, नोएल टाटा के बेटे नेविल एन. टाटा की नियुक्ति और टाटा संस के निदेशक के रूप में अपनी स्वतंत्र भूमिका को सीमित करने के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं।
श्रीनिवासन की शिकायत ऐसे समय आई है जब टाटा संस के नेतृत्व, कंपनी की शेयर बाजार में संभावित सूचीबद्धता और टाटा ट्रस्ट के अधिकारों को लेकर विवाद गहरा गया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट समेत टाटा के न्यासों के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।
श्रीनिवासन ने आरोप लगाया है कि 16 सितंबर को एसडीटीटी की ओर से जारी प्रस्ताव के जरिये उन्हें टाटा संस की प्रस्तावित सूचीबद्धता से जुड़े मामलों में भाग लेने और मतदान करने से रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा है कि यह उनकी स्वतंत्र राय और मतदान के अधिकार को सीमित करने की कोशिश थी।
इसके अगले दिन टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में श्रीनिवासन ने मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति और कंपनी की सूचीबद्धता की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। वहीं, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने दोनों प्रस्तावों का विरोध किया था।
उल्लेखनीय है कि टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के निदेशक मंडल ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी थी। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव निर्णायक मत के जरिये पारित हुआ था। इसके बाद में टाटा ट्रस्ट ने इन फैसलों की वैधता पर ही सवाल उठाए थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर