श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की धूम, 15 साल बाद रोहिणी नक्षत्र में मनेगा पर्व

युगवार्ता    04-Sep-2026
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उज्जैन का सांदीपनि आश्रम को फूलों से सजाया


दुल्हन की तरह सजा पन्ना का जुगल किशोर मंदिर


- भगवान श्रीकृष्ण की पाठशाला को फूल बंगले की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया

उज्जैन, 03 सितंबर (हि.स.)। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। इस बार 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बना है। इसके चलते शैव और वैष्णव दोनों संप्रदाय एक ही दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। जन्मोत्सव को लेकर भगवान श्रीकृष्ण की पाठशाला को फूल बंगले की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया है।

जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण को केसर स्नान कराया जाएगा। इसके बाद सांदीपनि वंश परिवार द्वारा तैयार विशेष नीलांबर यानी मोर पंखी रंग की मखमली पोशाक और भव्य आभूषण धारण कराए जाएंगे। वहीं, बाल स्वरूप लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के विशेष परिधान तैयार किए गए हैं।

पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी के वस्त्रों और श्रृंगार की तैयारियां करीब चार महीने पहले ही शुरू कर दी जाती हैं। इस बार परिधानों पर जरदोजी, रेशम और मोतियों की बारीक कारीगरी की गई है। इसके लिए विशेष सामग्री सूरत, जयपुर और कोलकाता से मंगाई गई है।

महाआरती में शामिल होंगे मुख्यमंत्री मोहन यादव

सांदीपनि आश्रम के पुजारी पंडित रूपम कीर्ति व्यास और पंडित राहुल व्यास ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में वाटरप्रूफ व्यवस्था की गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बार भी प्रतिवर्ष की तरह सपरिवार रात 12 बजे होने वाली महाआरती में शामिल होंगे और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन करेंगे। जन्माष्टमी के अगले दिन आश्रम में भव्य नंदोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

सांदीपनि आश्रम का धार्मिक और पौराणिक महत्व

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ महर्षि सांदीपनि के सानिध्य में इसी पवित्र भूमि पर शिक्षा प्राप्त की थी। कहा जाता है कि उन्होंने 64 दिनों में चार वेद, छह शास्त्र, 14 विद्याएं, 18 पुराण और 64 कलाओं का अध्ययन किया था।

आश्रम परिसर का एक स्थान 'अंकपात' के नाम से प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण यहां अपनी पाटी (अंक) धोया करते थे। इसी कारण इस स्थान का नाम अंकपात पड़ा। आश्रम परिसर में स्थित सर्वेश्वर महादेव का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं महर्षि सांदीपनि ने की थी। इसके पास स्थित गोमती कुंड के बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने गुरुदेव के लिए इसका जल प्रकट करके लाए थे।

पन्ना में भगवान जुगल किशोर का अलौकिक शृंगार, हीरा जड़ित मुरली के होंगे दर्शन

इधर, बुंदेलखंड के आराध्य देव और पन्ना के केंद्र भगवान जुगल किशोर मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व इस बार भी बेहद खास होने जा रहा है। जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान जुगल किशोर सरकार का विशेष शृंगार किया जाएगा। साल में सिर्फ एक दिन ऐसा अवसर आता है, जब भगवान जुगल किशोर को हीरा जड़ित विशेष मुरली धारण कराई जाती है। इस दुर्लभ मुरली और भगवान के आभूषणों में करोड़ों रुपये मूल्य के हीरे जड़े होने की बात कही जाती है।

वृंदावन से आएगी भगवान की विशेष पोशाक

जन्माष्टमी के दिन भगवान जुगल किशोर वृंदावन से लाई गई विशेष पोशाक धारण करेंगे। इसके साथ ही भगवान को बेशकीमती हीरा जड़ित मुरली पहनाई जाएगी। इस विशेष शृंगार के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पन्ना पहुंचते हैं। बताया जाता है कि मुरली में खास किस्म का हीरा जड़ा हुआ है, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘कोडिया’ किस्म का हीरा बताया जाता है। हालांकि इन बेशकीमती आभूषणों की आधिकारिक कीमत सार्वजनिक रूप से निर्धारित नहीं है, लेकिन इनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जाती है।

बुंदेलखंड की आस्था का प्रमुख केंद्र है मंदिर

पन्ना का जुगल किशोर मंदिर बुंदेलखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता है कि भगवान जुगल किशोर की मूर्ति वृंदावन से पन्ना लाई गई थी। स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बुंदेला शासकों के समय भगवान जुगल किशोर की भक्ति और मंदिर का महत्व तेजी से बढ़ा। मंदिर में विराजमान भगवान जुगल किशोर के विग्रह को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जुगल किशोर यहां स्वयंभू स्वरूप में विराजमान हैं। यही वजह है कि पन्ना ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड में भगवान जुगल किशोर को आराध्य देव के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है।

जन्माष्टमी पर दुल्हन की तरह सजाया जाएगा मंदिर

जन्माष्टमी के अवसर पर जुगल किशोर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया जाता है। जन्माष्टमी के दिन दोपहर 12 बजे भगवान के दर्शन होंगे। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और पूरे दिन जन्माष्टमी की तैयारियां चलेंगी। रात ठीक 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिर के कपाट खोले जाएंगे और श्रद्धालुओं को भगवान जुगल किशोर के विशेष और अलौकिक शृंगार के दर्शन होंगे।

जन्माष्टमी को लेकर मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पन्ना पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। श्रद्धालुओं में भगवान जुगल किशोर के विशेष शृंगार और हीरा जड़ित मुरली के दर्शन को लेकर खासा उत्साह है। भगवान जुगल किशोर का यह विशेष श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि पन्ना की सदियों पुरानी परंपरा और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी है। साल में एक दिन होने वाले इस विशेष शृंगार के कारण जन्माष्टमी पर जुगल किशोर मंदिर आस्था, परंपरा और राजसी वैभव के अनूठे संगम का साक्षी बन जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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