मप्र के उज्जैन में धूमधाम से निकली महाकाल की राजसी सवारी, सिंधिया ने किया पालकी पूजन

युगवार्ता    07-Sep-2026
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उज्जैन में निकली महाकाल की राजसी सवारी


- भगवान महाकाल ने नगर भ्रमण कर जाना प्रजा का हाल, 6 स्वरूपों में भक्तों को दिए दर्शन

भोपाल, 07 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सोमवार शाम को विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की भाद्रपद माह की अंतिम और राजसी सवारी पूरे ठाट-बांट और राजसी स्वरूप में निकाली गई। इस दौरान अवंतिनाथ ने नगर का भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जाना। सवारी में बाबा महाकाल ने छह स्वरूपों में भक्तों को दर्शन दिए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गोपाल मंदिर के पास विधि-विधान से पालकी पूजन किया।

रजत पालकी में विराजित होकर भगवान श्री महाकालेश्वर श्री चंद्रमोलेश्वर के स्वरूप में अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले तो सम्पूर्ण उज्जैन नगरी भगवान श्री महाकालेश्वर की जय-जयकार से गुंजायमान हो उठी। चारों दिशाओं में भगवान महाकाल की भक्ति में लीन भक्तो के नेत्र त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की एक झलक पाने के लिए अधीर थे।

श्री महाकालेश्वर भगवान की प्रमुख राजसी सवारी में रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, बैलगाडी में रथ पर श्री सप्तधान का मुखारविंद नगर भ्रमण पर अपनी प्रजा का हाल जानने निकले।

नगर भ्रमण पर निकलने के पूर्व महाकालेश्वर मंदिर परिसर में कोटितीर्थ कुण्ड के पास स्थित सभामण्डप में भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन कर भगवान की आरती की गई। पूजन-अर्चन मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न् कराया गया। महाकालेश्वर मंदिर के सभा मंडप में संभागायुक्त आशीष सिंह द्वारा भगवान चन्द्रमौलेश्वर का पूजन-अर्चन किया गया। सभा मंडप में संत अवधूत दादा गुरु, मंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री गौतम टेटवाल, मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और वैभव यादव ने भी भगवान चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया और आरती में सम्मिलित हुए।

पूजन के बाद निर्धारित समय पर भगवान श्री महाकाल की पालकी नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। सभामंडप में पूजन-अर्चन के दौरान कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, प्रशासक प्रथम कौशिक ने भगवान श्री महाकालेश्वर का पूजन -अर्चन किया और आरती में सम्मिलित हुए। आरती उपरांत भगवान चन्द्रमौलेश्वर ने रजत पालकी विराजमान होकर मंदिर प्रांगण से नगर भ्रमण हेतु प्रस्थान किया।

श्री महाकालेश्वर भगवान की प्रमुख राजसी सवारी बड़े धूमधाम व उल्लास के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर से नगर भ्रमण हेतु निकली। रजत पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुचें, असंख्य श्रद्धालुओं ने भगवान श्री महाकालेश्वर का स्वागत कर वंदन किया। भगवान श्री महाकालेश्वर की पालकी को महाकालेश्वर मंदिर से मुख्य द्वार परसशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई।

शाम करीब चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से महासवारी शुरू हुई। रजत पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिवतांडव, नंदी रथ पर उमा-महेश और दो अलग-अलग रथों पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद और सप्तधान मुखारविंद विराजमान रहे। सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धिपाल होते हुए रामघाट पहुंची। यहां क्षिप्रा तट पर बाबा महाकाल का पूजन और आरती की गई।

इसके पश्चात भगवान की पालकी अपने निर्धारित गंतव्य के लिए रवाना हुई। भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर जी की पालकी राजसी सवारी के परम्पगरागत मार्गों से होती हुई गोपाल मंदिर पहुंची। जहॉ पर सिंधिया स्टेट की वंशपरंपरानुसार केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा पालकी में विराजित श्री चन्द्रमोलेश्वर का पूजन-अर्चन किया। गोपाल मंदिर में पूजन के पश्चात सवारी पटनी बाजार और गुदरी चौराहे से होती हुई पुन: रात्रि 08:30 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।

पहली बार 15 हाईटेक ड्रोन से पुष्पवर्षा

इस बार महासवारी में 15 हाईटेक ड्रोन के जरिए देश-विदेश से मंगाए गए 50 क्विंटल से अधिक फूलों की पुष्पवर्षा की गई। शहनाई गेट पर गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान हुई पुष्पवर्षा ने माहौल को और भव्य बना दिया। इस वर्ष महासवारी की थीम सिंहस्थ महाकुंभ पर आधारित रही। सवारी मार्ग पर एक लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विशाल रंगोली और लाइव चित्रकला बनाई गई। इससे पूरा मार्ग आकर्षण का केंद्र बना रहा।

बैंड और भजन मंडलियों ने बांधा समां

कोयंबटूर से आए ईशा फाउंडेशन के विशेष बैंड 'नादयोग' के साथ पांच बड़े बैंड दल महासवारी में शामिल हुए। प्रत्येक बैंड दल में 250 से अधिक सदस्य रहे। इसके अलावा 70 भजन मंडलियों ने झांझ-मंजीरों के साथ भक्ति का माहौल बनाया। महासवारी के रामघाट पहुंचने पर बाबा महाकाल की पालकी और गजराज पर सवार मनमहेश स्वरूप का क्षिप्रा तट पर विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद मां क्षिप्रा की महाआरती हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार छत्री चौक और श्री गोपाल मंदिर पहुंचने पर सिंधिया स्टेट की ओर से पालकी में विराजित श्री चंद्रमौलेश्वर का विशेष पूजन-अर्चन किया गया।

सवारी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया

बाबा महाकाल की अंतिम राजसी महासवारी के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उज्जैन पहुंचे। उन्होंने महासवारी में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए। सिंधिया ने कहा कि अंतिम सवारी में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन करने का उन्हें सौभाग्य मिला है। सिंहस्थ-2028 को लेकर सिंधिया ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। वर्ष 2028 का सिंहस्थ ऐतिहासिक होने वाला है। यह केवल उज्जैन या मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण आयोजन है। उन्होंने सभी से इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने की अपील की।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के निर्देशन में सवारी मार्ग पर कुंज बिहारी पांडे एवं उनके दल द्वारा 1 लाख वर्गफीट क्षेत्र में भव्य रंगोलियों का निर्माण किया गया। रंगोली के माध्यम से सिंहस्थ महाकुंभ, भगवान महाकाल की दिव्यता तथा भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आकर्षक कलात्मक स्वरूप में प्रदर्शित किया गया। विशाल रंगोली ने सवारी मार्ग के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होकर श्रद्धालुओं एवं देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित किया।

महाकालेश्वर भगवान की राजसी सवारी के चल समारोह का स्वरुप भव्य और आकर्षक दिखायी दे रहा था भाद्रपद माह के दूसरे सोमवार पर भगवान की सवारी के दौरान पूरी नगरी शिवमय हो गई। सवारी में हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, डमरू, ढोल आदि वाद्य बजाते हुए महाकाल की आराधना करते हुए पालकी के साथ चल रहे थे। सम्पूर्ण मार्ग में चांदी की झाड़ू से झाडूवाहक भगवान के सवारी मार्ग को बुहारते हुए चल रहे थे। चोपदार व तोपची कड़ाबीन बजाते हुए भगवान के आगमन की सूचना देते हुए आगे चल रहे थे।

सवारी मार्ग पर आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक के माध्यम से सावन माह के प्रमुख चलचित्र, विशेष प्रस्तुतियों एवं डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया। सवारी के सुगमतापूर्वक दर्शन के लिये महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति द्वारा चलित रथ की व्यवस्था की गई है। जिसके दोनों ओर एल.ई.डी. के माध्यम से सवारी का लाईव प्रसारण किया गया, जिससे श्रद्धालु भगवान के दर्शनो का लाभ लिया। साथ ही उज्जैन के अन्य स्थानों जैसे फ्रीगंज, नानाखेड़ा, दत्तअखाड़ा आदि क्षेत्रों पर भी सवारी के लाइव प्रसारण मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से चलित रथ पर किया गया। राजसी सवारी में सम्पूर्ण सवारी मार्ग पर लगभग 10.20 लाख श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर भगवान के छ: स्वरूपों के दर्शन किए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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