नेपाल में बाढ़ के बाद सुरंगों में फंसे लोगों का बचाव अभियान बना जटिल

युगवार्ता    07-Sep-2026
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नेपाल के सुरंग में बचाव अभियान चला रही टीम


काठमांडू, 07 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरंगों के भीतर फंसे लोगों को बचाने का अभियान लगातार जटिल होता जा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कई संभावित बचाव अभियान चलाने पड़ रहे हैं, जिनमें अलग-अलग जोखिम, अनिश्चितताएं और चुनौतियां मौजूद हैं।

बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे 62 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ और भूविज्ञानी प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने कहा कि नेपाल इस समय एक असाधारण स्थिति का सामना कर रहा है, जहां कई संभावित बचाव अभियान एक साथ सामने हैं।

भारत के उत्तराखंड में वर्ष 2023 में सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों के सफल बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने वाले डिक्स ने नेपाल की मौजूदा स्थिति को अपने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक बताया।

सोमवार को सोशल मीडिया पर सिल्क्यारा बचाव अभियान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 41 श्रमिकों का सफल बचाव इस बात का प्रमाण था कि सामूहिक प्रयास से असंभव जैसी दिखने वाली चुनौतियों को भी पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक बड़ी चुनौती को पार कर लेना जरूरी नहीं कि सभी परीक्षाएं खत्म हो गई हों। इसके बजाय इससे और बड़ी जिम्मेदारियां सामने आ सकती हैं।

पश्चिमी अवधारणा में कर्तव्य और पूर्वी दर्शन में धर्म के बीच समानता बताते हुए डिक्स ने कहा कि बचाव अभियान में प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि सफलता की संभावना कितनी भी अनिश्चित क्यों न हो, सही काम करना जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि सिल्क्यारा बचाव अभियान ने उन्हें यह सीख दी कि किसी चीज के मुश्किल या असंभव जैसी दिखने को वास्तव में असंभव नहीं समझना चाहिए। वहीं, नेपाल की मौजूदा स्थिति उन्हें एक और महत्वपूर्ण सबक सिखा रही है—जब एक ही समय में कई लोगों की जिंदगी बचाव दलों पर निर्भर हो सकती है, तो उम्मीद को अनुशासित कार्रवाई में और संवेदना को व्यावहारिक सहायता में बदलना जरूरी है।

डिक्स के अनुसार किसी बचाव अभियान की असली परीक्षा केवल इस बात से नहीं होती कि कितनी जानें बचाई गईं, बल्कि इस बात से होती है कि परिस्थितियां कठिन होने, जिम्मेदारियां बढ़ने और परिणाम अनिश्चित रहने के बावजूद बचाव दल अपने प्रयास जारी रखते हैं या नहीं। डिक्स ने जोर देकर कहा कि किसी बचाव अभियान की सफलता का आकलन केवल बचाई गई जिंदगियों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने उन लोगों की तलाश और सहायता जारी रखने की जिम्मेदारी पर जोर दिया, जो अभी भी जीवित हो सकते हैं।

उनके संदेश ने पूर्वी नेपाल में आए 6.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान बचाव अभियानों का अनुभव करने वाले लोगों की पुरानी यादें भी ताजा कर दी हैं। कुछ लोगों ने कहा कि डिक्स के विचारों ने उन्हें पिछली आपदाओं की याद दिलाने के साथ-साथ मौजूदा संकट के बीच नई उम्मीद भी जगाई है।

भोटेकोशी से प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और विशेषज्ञ बचाव दल लगातार तैनात हैं। टीमें सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका वाले लोगों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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