कानून से भी नहीं लगा एसिड हमलों पर अंकुश
तेजाब शब्द का जिक्र ही मन में सिहरन पैदा कर देता है। ऐसे में कल्पना कीजिए जिन्होंने तेजाब के हमले का दंश झेला हो उनका क्या हाल होगा। बढ़ते तेजाबी हमलों को देखते हुए देश में वर्ष 2013 में आम लोगों के लिए तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसे केवल वही लोग खरीद सकते हैं जिनके पास लाइसेंस हैं। बावजूद इसके नियम कानून को दरकिनार कर तेजाब आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

कानून से भी नहीं लगा एसिड हमलों पर अंकुश

युगवार्ता    06-Jan-2023
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तेजाब शब्द का जिक्र ही मन में सिहरन पैदा कर देता है। ऐसे में कल्पना कीजिए जिन्होंने तेजाब के हमले का दंश झेला हो उनका क्या हाल होगा। बढ़ते तेजाबी हमलों को देखते हुए देश में वर्ष 2013 में आम लोगों के लिए तेजाब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसे केवल वही लोग खरीद सकते हैं जिनके पास लाइसेंस हैं। बावजूद इसके नियम कानून को दरकिनार कर तेजाब आसानी से उपलब्ध हो जाता है। प्रशासन की लापरवाही का परिणाम छात्राएं और युवतियां भुगत रही हैं। सवाल यह है कि तेजाब के हमलों पर कब लगाम लगेगी?


कानून से भी नहीं लगा एसिड हमलों पर अंकुश 

विजय कुमार राय

राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में बीते 14 दिसंबर को बाइक सवारों ने स्कूल जा रही 12वीं कक्षा की छात्रा पर तेजाब से हमला कर दिया। पुलिस ने इस घटना के कुछ देर बाद ही मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी छात्रा के पड़ोस में ही रहता था। पुलिस का कहना है कि वह छात्रा पर जबरदस्ती दोस्ती करने का दबाव बना रहा था। तेजाबी हमले में 17 साल की छात्रा का चेहरा और शरीर का अन्य हिस्सा बुरी तरह से झुलस गया है। घायल पीड़िता का इलाज सफदरजंग अस्‍पताल में चल रहा है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सचिन अरोड़ा, हर्षित अग्रवाल और वीरेंद्र सिंह उर्फ सोनू के रूप में हुई है। आरोपी सचिन ने एक ऑनलाइन शॉपिंग साइट से तेजाब खरीदा था। हालांकि ऑनलाइन साइट ने अब तक इस पर बयान नहीं जारी किया है। पुलिस ने गवाहों और स्थानीय स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपी व्यक्तियों की पहचान की और घटना के कुछ घंटों के भीतर ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी सचिन व पीड़िता के बीच इस साल सितंबर तक दोस्ताना संबंध थे। उसके बाद उनमें अनबन हो गई।

इस बीच तेजाब हमले की घटना पर दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्वीट कर लिखा, "देश की राजधानी में दो बदमाशों ने एक लड़की पर दिनदहाड़े तेजाब फेंका और भाग गए, क्या किसी को कानून का डर है?" दिल्ली महिला आयोग ने "एसिड की आसान उपलब्धता" पर ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट और एमेजॉन को नोटिस भेजा है।

मालीवाल ने ट्वीट कर लिखा, "17 साल की लड़की पर जो एसिड फेंका गया वो फ्लिपकार्ट से मंगाया था। एमेजॉन पर भी एसिड बिक रहा है। सोचिए कितना आसान है किसी के लिए भी तेजाब खरीदना…बटन दबाओ, घर बैठे तेजाब की होम डिलीवरी पाओ! मैं फ्लिपकार्ट और एमेजॉन को नोटिस जारी कर रही हूं, उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए!"

बहरहाल, पिछले 5 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो औसतन हर साल 200 एसिड अटैक हुए हैं। ऐसा तब है जब 2013 में एसिड की खुले आम बिक्री पर बैन लगाया गया था। एसिड अटैक से पीड़ि‍ता की रुह तक कांप जाती है, लेकिन इसके मामलों पर गौर करें पता चलता है कि ज्‍यादातर आरोपियों पर दोष साबित न हो पाने की स्थिति में वो बरी हो जाते हैं।

एनसीआरबी के पिछले 6 सालों का रिकॉर्ड कहता है, एसिड अटैक के मामले घटे हैं, लेकिन थम नहीं रहे। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने हालिया घटना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग की तरफ से कई बार नोटिस जारी किए गए। सुझाव दिए गए, लेकिन अभी भी बाजार में एसिड ठीक वैसे ही बिक रहा है, जैसे सब्‍जी। महिला आयोग ने दावा किया था कि दिल्ली के जिलों में एसिड बिक्री को लेकर निरीक्षण तक नहीं होता है। 

 
भारत में एसिड हमलों के मामले घटने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। सख्त कानून बनाने के बावजूद एसिड हमलों पर अंकुश लगाने में सरकार विफल रही है। इसकी प्रमुख वजह है अपराधियों को सजा देने में देरी।

 2021 में एसिड अटैक के 176 मामले सामने आए, लेकिन इनमें से मात्र 20 फीसदी मामलों में ही आरोपी पर दोष साबित हुआ। पिछले 6 सालों का रिकॉर्ड देखें तो औसतन 53 फीसदी मामलों में तेजाब फेंकने वाले पर दोष साबित ही नहीं हो और वो बरी हो गया।

 
पिछले साल पूरे देश में एसिड अटैक के सबसे ज्‍यादा मामले पश्चिम बंगाल में सामने आए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, महाराष्‍ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्‍थान है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में भर में एसिड अटैक के 60 फीसदी मामले दर्ज ही नहीं कराए जाते।

दुनियाभर में 80 फीसदी एसिड अटैक महिलाओं पर हो रहे। ऐसे 76 फीसदी मामलों में आरोपी पीड़ि‍ता की जान-पहचान का ही होता है। इतना ही नहीं, कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं जब पति ने पत्‍नी पर तेजाब फेंका। भारत में एसिड अटैक के मामलों को लेकर कानून भी है। ऐसे मामलों में धारा 326 के मुताबिक, दोषी को 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, अटैक की कोशिश करने वालों पर धारा 326 बी के तहत 5 से 7 साल तक की कैद और जुर्माना लगाया जा सकता है। कानून के बावजूद गाइडलाइन को नजरअंदाज करते हुए एसिड की हो रही खुलेआम बिक्री के कारण मामले नहीं थम रहे।

 

दिल्ली में तेजाब हमले के कुछ चर्चित मामले

14 दिसंबर 2022: मोहन गार्डन इलाके में 17 वर्षीय 12वीं की छात्रा पर बाइक सवार दो युवकों ने तेजाब फेंका।

2021: बवाना में शादी करने से इन्कार करने पर प्रेमी ने 23 वर्षीय युवती पर तेजाब फेंका। तेजाब से झुलसने से युवती कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही थी।

2021: जामा मस्जिद इलाके में एक किशोरी पर तेजाब फेंका। आरोपित को अबतक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

2019: विकासपुरी में दोस्ती खत्म कर लेने पर प्रेमी ने 19 वर्षीय युवती के चेहरे पर तेजाब फेंका।

2018: जहांगीरपुरी में ट्यूशन से घर लौटने के दौरान युवक ने 20 वर्षीय युवती पर तेजाब फेंका। युवक उस युवती से एक तरफा प्यार करता था।

2017: करावल नगर में 40 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो बेटियों पर तेजाब फेंककर खुद भी तेजाब पी लिया था।2017: मंगोलपुरी में प्रेमी ने एक युवती पर तेजाब की बोतल फेंकी।

22 मार्च 2017: दक्षिण दिल्ली के संगम विहार इलाके में युवक ने पड़ोसी युवती पर तेजाब फेंका।

17 अगस्त 2015: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में 12वीं की छात्रा पर पड़ोसी ने तेजाब फेंका।

23 दिसंबर 2014: पश्चिम दिल्ली के राजौरी गार्डन में महिला डॉक्टर पर बाइक सवारों ने तेजाब फेंका।

02मार्च 2014: मंगोलपुरी इलाके में एक सिरफिरे ने 26 साल की महिला पर तेजाब फेंका।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिना लाइसेंस के तेजाब की काउंटर पर बिक्री पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने को नौ साल बीत चुके हैं लेकिन सच्चाई यह कि तेजाब आसानी से मिल जाता है। दिल्ली में तो तेजाब बेचने वाले साइकिल पर टोकरी लादे तेजाब बेचते दिख जाएंगे। कई लोगों का तर्क रहता है कि वे बॉथरूम और फर्श साफ करने के लिए तेजाब का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह समय-समय पर तेजाब की बिक्री करने वालों पर छापे मारती है और उनपर उचित कानूनी कार्रवाई भी करती है।

2013 के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एसिड बेचने वाले प्रतिष्ठानों को ऐसा करने के लिए अनिवार्य रूप से लाइसेंस की आवश्यकता होगी और जहर अधिनियम के तहत पंजीकृत कराना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया था कि ऐसी दुकानों के मालिकों को एसिड खरीदने वाले ग्राहकों से एक पहचान पत्र मांगना होगा और उनसे एसिड खरीदने का कारण पूछना होगा। कोर्ट ने कहा था ऐसी दुकानों को अपने स्टॉक और एसिड की बिक्री का एक रजिस्टर भी बनाए रखने की जरूरत है।

एसिड हमले की पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एसिड की बिक्री को लेकर फैसला सुनाया था। लक्ष्मी ने एक अंग्रेजी अखबार को कहा कि आदेश के बावजूद एसिड की बिक्री बेरोकटोक जारी है। उन्होंने कहा कि कुछ भी नहीं बदला है और जानलेवा एसिड जिंदगियों को बर्बाद करना जारी रखे हुए है। अधिकारियों को कानून तोड़ने वाले ऐसे व्यक्तियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने एसिड से हुए ताजा हमले को लेकर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।