भारत की जनसंख्या नीति पर कोलकाता में महत्वपूर्ण सम्मेलन, यूएनएफपीए ने आईयूएसएसपी को सम्मानित किया

27 Nov 2025 16:45:00
नेशनल लाइब्रेरी कार्यक्रम


कोलकाता, 27 नवंबर (हि.स.)। कोलकाता में आयोजित इंडियन एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ पॉपुलेशन के 46वें वार्षिक सम्मेलन में भारत की जनसंख्या नीति, युवाओं की भूमिका और सतत विकास को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसी दौरान संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी यूएनएफपीए ने इंटरनेशनल यूनियन फॉर द साइंटिफिक स्टडी ऑफ पॉपुलेशन (आईयूएसएसपी) को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार प्रदान किए जाने पर औपचारिक रूप से सम्मानित किया। संगठन की अध्यक्ष डॉ. शिरीन जेजीभॉय ने कहा कि जटिल जनांकिकीय बदलावों के बीच तथ्य आधारित शोध नीति निर्माण की रीढ़ हैं और आईयूएसएसपी इसी लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

सम्मेलन का विषय 'जनसंख्या, हमारा ग्रह और समृद्धि' था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय दक्षिण बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केएन सिंह मौजूद रहे। पश्चिम बंगाल सरकार के सचिव विजय भारती और नेशनल लाइब्रेरी के महानिदेशक प्रोफेसर एपी सिंह ने भी अपनी उपस्थिति थे। दीप प्रज्ज्वलन और स्मारक भेंट कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

उद्घाटन सत्र को यूएनएफपीए में भारत की प्रतिनिधि एंड्रिया वोजनर ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया और कहा कि भारत आज विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी के साथ एक जनांकिकीय परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि देश अपनी युवा जनसंख्या को अवसरों, शिक्षा और क्षमताओं के विकास से किस तरह सशक्त बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत आंकड़ों, विज्ञान और वैश्विक साझेदारी पर आधारित जनांकिकीय नीतियां ही सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने का मार्ग तैयार कर सकती हैं।

सम्मेलन में वक्ताओं ने जनसंख्या वृद्धि, प्रवासन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, लैंगिक समानता, महिलाओं के अधिकार, स्थायी विकास और युवा शक्ति जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में तेज जनसंख्या वृद्धि, ऊर्जा के नए विकल्पों में भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति और युवाओं की सामाजिक भागीदारी से जुड़े बिंदु भी प्रमुख रहे।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को विशेष स्मारिका भेंट की गई। माइग्रेशन स्टडी और प्लानिंग ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे कई शोध प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

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