भारत-मॉरीशस के बीच शिक्षा प्रणाली के अंतरराष्ट्रीयकरण से गहरे ज्ञान और बहुमूल्यों का विकासः पृथ्वीराज सिंह रूपन

28 Nov 2025 21:00:01
मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने किया सम्मानित


- अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के विस्तार पर मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने किया सम्मानित

उज्जैन, 28 नवंबर (हि.स.)। मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने कहा कि भारत और मॉरीशस के बीच शिक्षा प्रणाली का अंतरराष्ट्रीयकरण गहरे ज्ञान और बहुमूल्यों का विकास है। इसके द्वारा योग और उसके वैदिक महत्व के साथ-साथ ज्ञान और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव, इसके विस्तार ने दोनों देशों की संस्कृति को समान बना दिया है।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति रूपन ने यह उद्गार शुक्रवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में 'भारतीय शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की पहल के अंतर्गत आयोजित सम्मान समारोह में प्राप्त सम्मान के प्रत्युत्तर में मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिक्षण को प्रोत्साहित करना है।

पूर्व राष्ट्रपति रूपन ने उज्जैन को 'दिव्य शहर' बताते हुए महाकालेश्वर मंदिर और भगवान कृष्ण के शिक्षा केंद्र के दर्शन के अनुभव को प्रस्तुत किया। साथ ही कहा कि हमें यह गर्व होना चाहिए कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना में अनेक विभूतियों ने अपना योगदान दिया और मॉरीशस की अनेक विभूतियों ने इस विश्वविद्यालय में अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली का अंतर्राष्ट्रीयकरण की पहल, इस विश्वविद्यालय के गहरे ज्ञान और बहुमूल्यों का विकास है। उन्होंने योग और उसके वैदिक महत्व के साथ-साथ ज्ञान और भारतीय संस्कृति से उसके जुड़ाव को भी विस्तार से समझाया।

पूर्व राष्ट्रपति रूपन ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले विश्वविद्यालय के छात्रों को बधाई दी और शैक्षणिक एवं पाठ्येतर गतिविधियों में समग्र विकास के लिए विश्वविद्यालय के संतुलित दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने अगले वर्ष विश्वविद्यालय की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने पर भी बधाई दी।

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह नगरी विज्ञान और कला के इतिहास के साथ-साथ 'काल गणना का केंद्र' होकर प्राचीन अंतरराष्ट्रीय शिक्षा स्थली भी है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने यहीं से शिक्षा ग्रहण की थी। इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार की 'वसुधैव कुटुंबकम्' योजना की सराहना की।

प्रो. भारद्वाज ने कहा कि मॉरीशस के नागरिक भारत को अपनी प्राथमिकता पर रखते हैं और आज भी मॉरीशस के छात्र यहां अध्ययनरत हैं। उन्होंने अध्ययनरत राजवीर का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके दिल में भारतीय जड़ें गहरी हैं। उन्होंने बताया कि राजवीर के दादा और चाचा ने भी इसी विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी। उन्होंने मॉरीशस के पूर्व छात्रों के साथ फिर से जुड़ने और मॉरीशस के छात्रों का अध्ययन के लिए स्वागत करने की इच्छा व्यक्त की, जिससे दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध बन सकें।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति की सांस्कृतिक एवं गीतात्मक भव्यता को दर्शाते हुए विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी। हिना वासेन ने शिव आराधना प्रस्तुत की, जबकि मान्या अग्रवाल ने राजस्थानी लोकनृत्य से समां बांधा। अंशिता नामदेव ने कृष्ण भक्ति पर आधारित प्रस्तुति दी, वहीं संस्कृति तिवारी ने संबलपुरी नृत्य और उमेशा गोस्वामी ने बिहू नृत्य प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ. एस.के. मिश्रा और विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डीके बग्गा, अवंतिका विश्वविद्यालय की डॉ. प्रिया राव ने किया। आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, गणमान्य व्यक्तियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

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