विकास भारती में हुआ धरती आबा संग्रहालय का उद्घाटन, जनजातीय समाज पर आधारित पांच पुस्तकों का लोकार्पण

29 Nov 2025 20:40:01
कार्यक्रम की तस्वीर


कार्यक्रम की तस्वीर


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री जुएल उरांव


कार्यक्रम में मौजूद लोग


कार्यक्रम का दीप प्रज्वलित करते अतिथि


पुस्तक का विमोचन करते अतिथि फोटो


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री जुएल उरांव


रांची, 29 नवंबर (हि.स.)। धरती आबा संग्रहालय का उद्घाटन शनिवार को बरियातू रोड स्थित आरोग्य भवन के विकास भारती परिसर में किया गया। संग्रहालय का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव, विशिष्ट् अतिथि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष पद्मभूषण रामबहादुर राय एवं विकास भारती के सचिव अशोक पद्मश्री डॉ अशोक भगत ने संयुक्त रूप से किया।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केंद्र के अध्‍यक्ष और पद्मभूषण डॉ राम बहादुर राय ने की।

इस अवसर पर धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान-जनजातीय कौशल केन्द्र, जनशिक्षण संस्थान का ऑनलाइन उद्घाटन सहित पांच पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। इन पुस्तकों में धरती आबा संग्रहालय की पुस्तिका, ‘मुंडारी साहित्य की प्रासंगिकता,’ सुंदरबन के गीत और अवनींद्र नाथ टैगोर लीगेसी रीविटेड एवं ट्राईबल स्टडी सेंटर, विकास भारती की ओर से मावड़ो भाषा में लिखी गई पुस्तक बचपन अक्षरज्ञान शामिल है।

इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत विकास भारती की छात्राओं की ओर से गाए जनजातीय स्वागत गीत से हुई। इसके बाद अतिथियों का स्वागत और परिचय विकास भारती की उपाध्यक्षा डॉ रंजना चौधरी ने किया। विकास भारती के सचिव पद्मश्री अशोक भगत ने विषय प्रवेश कराते हुये जनजातीय समाज के विकास के लिए संस्था की ओर से राज्य स्तर पर विगत 43 वर्षो से किये जा रहे प्रयास का संक्षेप में जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संस्थान की ओर से झारखंड के 1500 गांवों में जनजातीय समाज के कल्यंण का कार्य किया जा रहा है।

इसके बाद आईजीएनसीए के क्षेत्रीय निदेशक कुमार संजय झा ने धरती आबा संग्रहालय के विषय में उपस्थित लोगों को अवगत कराया। उन्होंने इस संग्रहालय की विशेषताओं और इसके निमार्ण से संबंधित पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं विश्ष्टि अतिथि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा के विषय में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंति, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150वीं वर्षगांठ, सरदार पटेल की 150 वीं जयंति एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100वें स्थापना वर्ष में किया गया है। उन्होंंने धरती संग्रहालय की स्थापना को देशवासियों के लिए गौरव का क्षण बताया।

सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 10 राज्यों। में 11 बड़े-बड़े संग्रहालय खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संग्रहालय निर्माण के जरिए देश पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा संग्रहालय में सैकड़ों वर्ष पुराने वाद्य यंत्र और अन्यम उपयोगी वस्तुएं रखी गई हैं। इसके लिए विकास भारती बधाई का पात्र है। संग्रहालय की मदद से भविष्य में जनजातीय समाज को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि विकसित भारत में देश का आदिवासी समाज अग्रणी भूमिका निभाएगा।

देश के जनजातीयों के उत्थान पर खर्च होंगे 79 हजार करोड़ रुपये : जुएल ओराम

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने कहा कि देश के जनजातीय समुदाय की सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा की है। उन्होंने कहा कि जनजातीय की शिक्षा को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष कार्य करने की इच्छा प्रकट की थी। आरोम ने कहा कि देश के जनजातीय समाज के उत्थान पर 79 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि को 17 केंद्रीय मंत्रालयों की ओर से सामुहिक रूप से देश के 549 जिलों के 2911 प्रखंडों के 63845 गांवों में 25 तरह के विकास कार्य (रोड, आवास, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, 25 लाख जनजतीय आवास, 1000 मोबाईल युनिट, 728 जवाहर केन्द्रीय विद्यालय, 78 जनजातीय संग्रहालयों का निर्माण) होंगे। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा का गांव मौजूदा समय में तीर्थ स्थल बन गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से देश में बनाए जा रहे एकलव्य विद्यालय नवोदय और केंद्रीय विद्यालय से भी आगे रहेगा। उनका विभाग इस पर काम कर रहा है।

धरती आबा संग्रहालय जनजातीय समाज के लिए तीर्थ क्षेत्र के समान : डॉ रामबहादुर राय

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मभूषण डॉ रामबहादुर राय ने नरेन्द्र मोदी की ओर से किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने इस दौरान जनजातीय गौरव को पुनः स्थापित करने पर जोर दिया। डॉ राय ने कहा कि भारत का इतिहास विश्व के अन्य देशों के इतिहास से अधिक गौरवमयी और बहुत विशाल है। इसे जितना अधिक जाना और अध्ययन किया जाए, उतना ही कम है। उन्होंने कहा कि अब तक हमें बनारस के जिन ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया गया था, वह गलत था। उन्होंने उपस्थित लोगों को बनारस के वास्तविक इतिहास से अवगत कराया।

डॉ राय ने कहा कि 1857 से पहले बनारस में बाबू जगज सिंह के नेतृत्व में हिंदू और मुस्लिम के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा गया था। इतिहास की इस सच्चाई से हम सभी को अनभिज्ञ रखा गया। उन्होंने कहा कि देश में प्रचारित किया गया कि सारनाथ की खोज कनिंघम ने की थी, लेकिन सत्य यह है कि इसकी खोज जगत सिेंह ने ही की थी। उन्होंंने धरती आबा संग्रहालय को जनजातियों के तीर्थ क्षेत्र के समान बताया है। उन्होंने कहा कि लोग इस संग्रहालय को देखने आएंगे इससे एक नए युग की शुरूआत होगी।

कार्यक्रम का संचालन विकास भारती की एचआर कृति सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन विकास भारती के संयुक्त सचिव महेन्द्र भगत ने किया।

इस अवसर पर राज्यसभा के पूर्व सांसद समीर उरांव, क्षेत्रीय संगठन मंत्री नागेंनाथ त्रिपाठी, पद्मश्री और वरिष्ठ पत्रकार बलवीर दत्त, भाजपा नेता सुबोध सिंह गुडडू, विकास भारती के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार सिंह, भाजपा के पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्ययक्ष किशोर मंत्री सहित कई विश्विविद्यालयों के कुलपति सहित सैकड़ों जनजातीय समाज के लोग और प्रबुद्ध मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे

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