
- कोलकाता में मिली डिलीट की उपाधिकोलकाता, 29 नवम्बर (हि.स.)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को कहा कि मौजूदा दौर में राजनीति लगातार आर्थिक नीतियों पर भारी पड़ रही है। वे कोलकाता के जोका स्थित आईआईएम कोलकाता परिसर में मानद डॉक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने के बाद बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा समय है, जब राजनीति अर्थ व्यवस्था को पीछे छोड़ रही है और यह कोई शब्दों का खेल नहीं है। वैश्विक राजनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब पुराने ढांचों की जगह देशों से सीधे द्विपक्षीय आधार पर संबंध तय कर रहा है, जबकि चीन अपने बनाए नियमों के अनुसार चल रहा है और यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
जयशंकर ने कहा कि इस माहौल में कई देश यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना चाहिए या उसके बीच होने वाले समझौतों और हितों के संतुलन पर। वैश्वीकरण, बिखराव और आपूर्ति असुरक्षा के दौर में बाकी दुनिया हर तरह की परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार कर रही है। देशों में मुक्त व्यापार समझौतों के प्रति उत्साह बढ़ना इसी प्रवृत्ति का संकेत है।
उन्होंने बताया कि वैश्विक उत्पादन का बड़ा हिस्सा आज चीन में होता है, जिससे आपूर्ति की मजबूती और भरोसेमंदी की जरूरत और बढ़ जाती है। संघर्षों और जलवायु घटनाओं ने बाधाओं का खतरा और बढ़ाया है। ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका अब बड़े आयातक से महत्वपूर्ण निर्यातक बन चुका है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा में चीन का दबदबा है।
व्यापार तनावों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आपूर्ति संबंधी जोखिम मांग की अनिश्चितताओं से और बढ़ रहे हैं। शुल्क दरों का महत्व बढ़ने से वैश्विक व्यापार में उतार–चढ़ाव तेज हुआ है और वित्तीय मोर्चे पर प्रतिबंधों, परिसंपत्तियों की जब्ती और ब्लॉकचेन तकनीकों का उभार नई वास्तविकताएं बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इन वैश्विक बदलावों के बीच भारत ने मेक इन इंडिया को मजबूती से आगे बढ़ाया है, जो हमारी व्यापक राष्ट्रीय शक्ति को बढ़ाने, कमजोरियों को घटाने और वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि एक उभरती शक्ति के लिए मजबूत औद्योगिक आधार आवश्यक है और यह सोच पहले हमेशा स्वीकार नहीं की जाती थी।
जयशंकर ने उद्योग जगत से अल्पकालिक सोच छोड़कर घरेलू आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने की अपील की ताकि वैश्विक नेटवर्क में भागीदारी के साथ देश की औद्योगिक क्षमता भी मजबूत हो। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया अब शोध, नवाचार और डिजाइन के साथ और सशक्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना राष्ट्रीय जरूरतों की पूर्ति के लिए अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से भारत नए व्यापार समझौतों और कनेक्टिविटी पहलों पर तेज़ी से काम कर रहा है, जो दुनिया के भारत के प्रति बढ़ते भरोसे को भी दर्शाता है।
जयशंकर ने कहा कि जैसे–जैसे भारत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ऊपर उठ रहा है, इन पहलों की महत्ता और बढ़ेगी। व्यापार के मामलों में भारत लोगों को केंद्र में रखकर निर्णय करेगा और कनेक्टिविटी योजनाएं रणनीतिक और आर्थिक दोनों लक्ष्यों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जाएंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर