काशी–तमिल संगमम 4.0 : उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं सीएम योगी

30 Nov 2025 21:08:01
जागरूकता कार्यक्रम


- तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि और पुदुच्चेरी के उप-राज्यपाल के. कैलासनाथन की भी खास उपस्थिति

वाराणसी, 30 नवम्बर (हि.स.)। काशी और तमिलनाडु की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाले कार्यक्रम काशी–तमिल संगमम 4.0 की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (तकनीकी शिक्षा एवं साक्षरता) गोविंद जायसवाल ने रविवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित एलडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष संगमम दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण 2 से 15 दिसंबर तक वाराणसी (काशी) में तथा द्वितीय चरण 15 से 31 दिसंबर तक तमिलनाडु में यह कार्यक्रम ​होगा। प्रथम चरण के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि होंगे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि तथा पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल के. कैलासनाथन को भी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।

आदान-प्रदान का व्यापक कार्यक्रम

संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने बताया कि तमिलनाडु से सात प्रतिनिधि समूह काशी आएंगे। वहीं, दूसरे चरण में बनारस के लगभग 300 छात्र तमिलनाडु भेजे जाएंगे।

इसके अलावा तमिलनाडु के 50 शिक्षक काशी में विद्यालयों के विद्यार्थियों को तमिल भाषा, संस्कृति और परंपराओं का परिचय देंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष संगमम का मुख्य विषय है- “तमिल सीखें–तमिल करकलम”। इसका उद्देश्य भाषाई, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करना है। तमिलनाडु और काशी की प्राचीन सभ्यता, लोक कलाएं, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं, साझा चिंतन और संवाद की संस्कृति- ये सब मिलकर भारत की समृद्ध विरासत का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि काशी–तमिल संगमम 4.0 सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है। यह एक राष्ट्रीय आंदोलन है जो एक भारत-श्रेष्ठ भारत की मूल भावना को जीवंत करता है। इस मंच के माध्यम से तमिलनाडु और उत्तर भारत के युवा, विद्यार्थी, शिक्षक एवं आम नागरिक एक-दूसरे से जुड़ेंगे, एक दूसरे की भाषा और संस्कृति को समझेंगे, सीखेंगे और सम्मान देंगे। यह विविधता में एकता का प्रतीक बनेगा। जहां तमिल संस्कृति और भाषा से परिचय मिलेगा और भारतीय राष्ट्रीय एकता व सहअस्तित्व की भावना को और मज़बूत किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगमम से आने वाली पीढ़ियां न केवल तमिल भाषा जानेंगी बल्कि उसकी गहराई, उसकी सांस्कृतिक समृद्धि और भारत के साझा सांस्कृतिक-ऐतिहासिक विरासत का अनुभव करेंगी। उन्होंने सभी नागरिकों विशेष तौर पर युवाओं और छात्रों से आह्वान किया कि वे “तमिल सीखें-तमिल करकलम” अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और इस सांस्कृतिक यात्रा को सार्थक बनाएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

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