प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, ओमकार जप में हुए शामिल

10 Jan 2026 22:23:53
प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान सोमनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक किया


सोमनाथ मंदिर पहुंचे पीएम मोदी


मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने किया सोमनाथ में प्रधानमंत्री का स्वागत


- श्री सोमनाथ ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक

सोमनाथ, 10 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री समेत अन्य नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद वे सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक किया और ओमकार जाप में हिस्सा लिया।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने वीवीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उनकी अध्यक्षता में सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी हमीरजी सर्कल से पैदल चलकर सोमनाथ मंदिर पहुंचे। इस दौरान दिग्विजय द्वार पर साधु-संतों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे 72 घंटे चल रहे ओमकार जप अनुष्ठान में शामिल हुए। इस दौरान मोदी ने भगवान सोमनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक किया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में आयोजित भव्य ड्रोन शो का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी उनके साथ उपस्थित रहे।

सोमनाथ पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं, जो हमारी सभ्यतागत हिम्मत का गौरवशाली प्रतीक है. यह दौरा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान हुआ है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के हज़ार साल पूरे होने पर एक साथ आया है। लोगों का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभारी हूं।

पीएम मोदी ने अपने दूसरे एक्स पोस्ट में लिखा कि आज शाम सोमनाथ में, मैंने श्री सोमनाथ ट्रस्ट की एक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और भी यादगार बनाने के तरीकों की समीक्षा की।

उल्लेखनीय है कि गजनवी के आक्रमण के 1000 वर्ष पूर्ण होने और मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। नन्हीं बालिकाओं से लेकर वृद्ध महिलाओं तक, 100 आहिरराणियां पारंपरिक वेशभूषा और लोकसंगीत की धुनों पर संस्कृति का गौरव प्रस्तुत की।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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