
- महाकाल महालोक में आयोजित पांच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन शंकर महादेवन अपने बेटों के साथ देंगे प्रस्तुति
भोपाल, 12 जनवरी (हि.स.)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है। यहां पहली बार श्री महाकल महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को शाम 7 बजे श्री महाकाल महालोक में इस पांच दिवसीय ' महोत्सव' का शुभारंभ करेंगे।
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने सोमवार को बताया कि 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्री महाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है।
सुरों की सरिता: दिग्गज कलाकार देंगे प्रस्तुतियां उन्होंने बताया कि महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। इनमें 14 जनवरी को महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ 'शिवोऽहम्' की संगीतमय प्रस्तुति देंगे।
- 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध 'द ग्रेट इंडियन क्वायर' 'शिवा' थीम पर प्रस्तुति देगा।- 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।- 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी।- 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत 'शिव केंद्रित नृत्य नाटिका' से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा।
लोक और जनजातीय कला का वैभव
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्य प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। साथ ही, प्रतिदिन निकलने वाली 'कला यात्रा' शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुंचेगी, जिसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे।
बौद्धिक विमर्श: 'शिव तत्व और र महाकाल'
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय 'शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में' रखा गया है, जहां विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराइयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।
इस संगोष्ठी में दस से अधिक देशों और भारत के बारह से अधिक राज्यों के विद्वान विषय के विविध पक्षों पर प्रकाश डालेंगे। इन देशों में मॉरीशस, नीदरलैंड, फीजी, यूएसए, यूके, आयरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल आदि सम्मिलित हैं। संगोष्ठी में भारत के राज्यों उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश आदि के विशेषज्ञ विद्वान सम्मिलित होंगे।
वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस संगोष्ठी का आयोजन त्रिवेणी कला एवं पुरातत्व संग्रहालय, जयसिंहपुरा, महाकाल लोक में प्रातः काल 11 से सन्ध्या 4:30 बजे तक किया जाएगा। संगोष्ठी में देश - विदेश के विविध क्षेत्रों में शिवोपासना, पुराख्यान, पुरातत्व, इतिहास, शैव दर्शन, साहित्य, वास्तु, मुद्राशास्त्र, शिल्प, चित्र आदि पर गहन मंथन किया जाएगा। संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वानों में आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा, डॉ. रामा तक्षक, नीदरलैंड, डॉ. सोमदत्त काशीनाथ, वकोका, मॉरीशस, डॉ. आशुतोष द्विवेदी, फिजी, डॉ. बीर बहादुर महतो नेपाल, डॉ. मीरा सिंह फिलाडेल्फिया यूएसए, डॉ. सदाशिव कुमार द्विवेदी वाराणसी, डॉ. शुभंकर मिश्रा मॉरीशस, डॉ. अजय कुमार झा, जनकपुर नेपाल, डॉ. हरिसिंह पाल नई दिल्ली, पुरातिहासकार डॉ. शांतिस्वरूप सिन्हा वाराणसी के अलावा अनेक विद्वान भाग लेंगे।--------------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर