पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 19 को करेंगे नई वैश्विक पहल 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स' का शुभारम्भ

13 Jan 2026 18:42:53
प्रेस वार्ता


नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 19 जनवरी को वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन की ओर से आयोजित होने वाली 'रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स' पहल का शुभारम्भ करेंगे।

यह जानकारी मंगलवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में दी गयी।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोविंद होंगे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति में इस इंडेक्स को सार्वजनिक किया जाएगा। भारत के पहले वैश्विक स्तर पर आधारित पहल है। इसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान , मुंबई और डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का भी सहयोग है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रों को उनके नागरिकों, पर्यावरण और वैश्विक समुदाय के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल एवं वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि किसी देश की सफलता का पैमाना केवल जीडीपी नहीं होना चाहिए। असली मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि देश अपने नागरिकों, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जलवायु और आने वाली पीढ़ियों के प्रति कितना जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट हर साल मार्च के आखिरी शुक्रवार को जारी की जाएगी।

​दस्तावेजों के अनुसार, वर्तमान में दुनिया जलवायु परिवर्तन, युद्ध, मानवीय आपातकाल और लोकतंत्र पर बढ़ते दबाव जैसे संकटों से जूझ रही है जहां देशों की क्षमताएं तो बढ़ी हैं, लेकिन उनकी 'नैतिक जिम्मेदारी' में कमी देखी गई है।

इस मौके पर प्रो. जगदीश मुखी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के एडवाइजरी बोर्ड के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत) अरुण कुमार मिश्रा, डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटिल, सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के अध्यक्ष प्रो. राजीव दासगुप्ता और सचिव, वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन के सचिव सुधांशु मित्तल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि यह पहल 'वसुधैव कुटुंबकम' और नैतिक संयम जैसे सभ्यतागत मूल्यों को आधुनिक नीतिगत उपकरणों में बदलने के विश्वास पर आधारित है। इससे राष्ट्रों की प्रगति को केवल उनकी संपत्ति या जीडीपी के आधार पर नहीं बल्कि उनकी जिम्मेदारियों के आधार पर मापेगा।

​इंडेक्स के निर्माताओं का कहना है कि यह पूरी तरह से यूनाइटेड नेशंस और यूएनडीपी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रामाणिक डेटा पर आधारित है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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