उपराष्ट्रपति के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘नशा-मुक्त परिसर अभियान’ शुरू

13 Jan 2026 15:53:53
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मंगलवार को डीयू में ड्रग फ्री कैंपस अभियान के शुभारंभ के अवसर पर


— नशा-मुक्त कैंपस युवाओं और देश के भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता : धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली, 13 जनवरी (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘नशा-मुक्त परिसर अभियान’ का शुभारंभ करते हुए देशभर में नशा-मुक्त परिसरों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ, नशा-मुक्त और उद्देश्यपूर्ण युवा ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की मजबूत नींव हैं।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि मूल्य निर्माण, नेतृत्व विकास और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने वाले संस्थान हैं। उन्होंने चेताया कि नशा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य का संकट और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है, जिसका संबंध नार्को-आतंकवाद से भी जुड़ता है।

उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर चरित्र, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण जीवन को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार कर सकते हैं। विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे केंद्र हैं जहां मूल्यों का निर्माण होता है, नेतृत्व गढ़ा जाता है और राष्ट्र का भविष्य तय होता है। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हैं, तो यह पूरे समाज को एक सशक्त संदेश देता है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने ‘नशामुक्त परिसर अभियान’ के तहत एक समर्पित ई-प्रतिज्ञा मंच और मोबाइल एप का भी शुभारंभ किया। उन्होंने देशभर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने और नशामुक्त परिसर की शपथ लेने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अपील की कि इस अभियान को सभी केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक युवा राष्ट्र है और मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चुनौती, सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा और देश की जनसांख्यिकीय क्षमता के लिए खतरा है। उन्होंने चेताया कि नशा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक प्रदर्शन, पारिवारिक सौहार्द, उत्पादकता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, जिसका संबंध नार्को-आतंकवाद से भी है।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ, नशामुक्त और लक्ष्यनिष्ठ युवा ही कौशल अर्जन, उद्यमिता और आर्थिक विकास में सार्थक योगदान दे सकते हैं। भारत की प्राचीन परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मसंयम, मानसिक संतुलन और शुद्ध आचरण के महत्व को रेखांकित किया तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा योग और ध्यान को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने ‘माय भारत पोर्टल’ और ‘प्रधानमंत्री अनुसंधान योजना’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कार्यक्रम युवाओं की ऊर्जा को अनुसंधान, नवाचार, स्वैच्छिक सेवा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में मोड़ने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी मानसिक स्वास्थ्य, जीवन कौशल और छात्र कल्याण पर बल देकर इसी समग्र दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श तंत्र, छात्र-नेतृत्व वाली पहलों और विभिन्न हितधारकों के सहयोग से यह संस्थान एक आदर्श नशामुक्त परिसर के रूप में उभरेगा। उन्होंने छात्रों से सतर्क रहने, संकट में साथियों का सहयोग करने, नशे के खिलाफ आवाज उठाने और स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में नशा-मुक्त परिसर अभियान का शुभारंभ युवाओं और देश के भविष्य के प्रति एक दृढ़ प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान नशा-मुक्त भारत अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और देश के करीब 16 लाख शैक्षणिक संस्थानों तक इसकी पहुंच यह दर्शाती है कि हमारे शैक्षणिक संस्थान ड्रग-फ्री इंडिया के अग्रिम मोर्चे पर हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्र कल्याण राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है और नशा-मुक्त परिसर अभियान पूरी तरह से एनईपी के विज़न के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि इस पहल के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय ने नशा-मुक्त उच्च शिक्षण संस्थानों की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इसके लिए उन्होंने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए शिक्षकों और प्रशासकों से ऐसा कैंपस कल्चर विकसित करने का आग्रह किया, जिसमें छात्रों को शैक्षणिक सहयोग के साथ-साथ भावनात्मक सहयोग भी मिले।

प्रधान ने छात्रों, शिक्षकों और प्रशासकों से अपने-अपने परिसरों को नशा-मुक्त बनाने की प्रतिबद्धता लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि युवाशक्ति, समाज और राष्ट्र के प्रति एक सामूहिक संकल्प है, जिसे समर्पण, संवेदनशीलता और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद, दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

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