
नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)। बीज अधिनियम 2026 के माध्यम से हर किसान को सुरक्षित, भरोसेमंद और उत्पादक बीज उपलब्ध कराने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जा रहा है। इसके लिए केन्द्र सरकार विधेयक लाने जा रही है। जिसमें सख्त प्रावधानों पर आधारित तीन बड़े बदलाव किए जाएंगे।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि पुराने 1966 के बीज अधिनियम में दंड के प्रावधान काफी कमजोर हैं। किसानों को घटिया और नकली बीजों से बचाने तथा जानबूझकर इन्हें बेचने वालों को कड़ी सजा देने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि नकली या खराब गुणवत्ता वाला बीज बेचने डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पहले से अधिक जुर्माना भी भरना पड़ेगा। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिलें।
कृषि मंत्री ने कहा कि नए बीज अधिनियम के जरिए सार्वजनिक संस्थानों (आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय) और उच्च गुणवत्ता वाले देसी बीज उत्पादकों को मजबूत किया जाएगा। वहीं, विदेशी बीजों के लिए कड़े मूल्यांकन नियम लागू होंगे। उन्होंने कहा, “विदेश से आने वाले बीज पूरी तरह जांच और मूल्यांकन के बाद ही स्वीकृत होंगे। हमारे सार्वजनिक और देसी निजी क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा ताकि किसानों तक अच्छे बीज पहुंचें।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ जैसे प्रयास शुरू किए हैं ताकि वैज्ञानिक, अधिकारी और प्रगतिशील किसान गांवों तक जाकर किसानों को जागरूक कर सकें। देश के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को बीजों की गुणवत्ता, बीज चयन और शिकायत निवारण की जानकारी देने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि राज्य का विषय है और राज्य सरकारों के अधिकार वैसे ही बने रहेंगे। केंद्र केवल समन्वय करेगा और राज्यों के सहयोग से यह कानून लागू होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि हर किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज मिले, अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन और गलत करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। बीज अधिनियम 2026 के माध्यम से सरकार हर किसान को सुरक्षित, भरोसेमंद और उत्पादक बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी