
पूर्वी चंपारण, 16 जनवरी (हि.स.)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिला के केसरिया रोड स्थित कैथवलिया गांव इन दिनों पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यहां बन रहे विश्व के सबसे बड़े विराट रामायण मंदिर और इस परिसर में स्थापित होने वाला सहस्त्रलिंगम शिवलिंग इस समय चर्चा का मुख्य विषय है। शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा 17 जनवरी 2026 को होने जा रही है और इसकी तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं।
विशाल शिवलिंग की स्थापना के लिए विशेष क्रेन मंगाई जा चुकी है। स्थापना के बाद कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री समेत देश की प्रमुख नदियों के जल से हेलीकॉप्टर द्वारा जलाभिषेक और पुष्पवर्षा की योजना बनाई गई है। देशभर से साधु-संत और आचार्य यहां पहुंचने लगे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
चंपारण प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरिकिशोर राय, पूर्वी चंपारण के उपायुक्त जिलाधिकारी (डीएम) सौरभ जोरवाल, पुलिस कप्तान स्वर्ण प्रभात और अन्य अधिकारी लगातार मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। हेलीपैड, भीड़ प्रबंधन, यातायात, पार्किंग और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है।
श्रद्धालुओं के भारी जुटान की संभावना के को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन सजग है। स्थानीय लोग भी प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मंदिर के उद्घाटन को लेकर लोगों में भारी उत्साह है और हर-हर महादेव, बोलबम के नारे पूरे क्षेत्र में गूंज रहे हैं।
तमिलनाडु से लाए गए 33 फीट ऊंचे और 210 टन वजनी इस सहस्त्रलिंगम शिवलिंग में 1008 शिवलिंग की प्रतिकृतियां बनी हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इसके जलाभिषेक से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्राण-प्रतिष्ठा से पहले अब तक 50 लाख से अधिक लोग इसका दर्शन कर चुके हैं और प्रतिदिन लगभग तीन लाख लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं।
श्रद्धालु वंदना देवी ने बताया कि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है और इसकी ख्याति सुनकर उनके गांव की दर्जनों महिलाएं यहां पहुंची। मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से श्रद्धालुओं का जत्था कई किलोमीटर पैदल चलकर दर्शन को आया।
स्थानीय नागरिक मिश्रीलाल पटेल बताते है कि शिवलिंग के पहुंचने के बाद लोगों का तांता लगा है, भीड़ बढ़ने के साथ ही यहां कई छोटे होटल भी खुल चुके हैं और ठंड के बचाव के लिए चाय के छोटे-छोटे स्टॉल भी कई जगह लगे हुए हैं। अधिकांश श्रद्धालु शिवलिंग के आसपास रह रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस मंदिर के निर्माण की पहल भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व पदाधिकारी और महावीर मंदिर न्यास ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने की थी। उनके असामयिक निधन के बाद उनके पुत्र सायण कुणाल और पुत्रवधू, सांसद शांभवी चौधरी, उनके सपने को साकार कर रहे हैं। साथ ही पटना हनुमान मंदिर और धार्मिक न्यास ट्रस्ट के पदाधिकारी व सदस्य दिन-रात तैयारियों में जुटे हैं।
विश्व का यह विराट रामायण मंदिर और सहस्त्रलिंगम महादेव 17 जनवरी को एक अनंत कथा का साक्षी बनेगा और इसे बिहार की अध्यात्मिक धरोहर के रूप में विश्वभर में पहचान मिलेगी।---------
हिन्दुस्थान समाचार / आनंद कुमार