देउबा गुट का दावा: 885 प्रतिनिधियों ने विशेष महाधिवेशन को दिया समर्थन वापस लिया

16 Jan 2026 12:34:53
निर्वाचन आयोग को दस्तावेज सौंपते देउवा गुट के नेता


काठमांडू, 16 जनवरी (हि.स.)। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेरबहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट ने दावा किया है कि पार्टी के दूसरे विशेष महाधिवेशन के समर्थन में हस्ताक्षर करने वाले महाधिवेशन प्रतिनिधियों में से 885 प्रतिनिधियों ने अपनी सहमति वापस ले ली है।

शुक्रवार को निर्वाचन आयोग पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में नेताओं पूर्ण बहादुर खड्का और शेखर कोइराला ने कहा कि संबंधित प्रतिनिधियों ने औपचारिक रूप से विशेष महाधिवेशन से दूरी बना ली है और समर्थन वापस लेने संबंधी लिखित सूचनाएं जमा कराई हैं।

खड्का ने कहा, “हस्ताक्षर करने वालों और प्रतिभागियों में से 885 प्रतिनिधियों ने अपनी सहमति वापस ले ली है। कर्णाली प्रदेश से सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने केंद्रीय कार्यालय के माध्यम से कार्यवाहक पार्टी अध्यक्ष को संबोधित दस्तावेज जमा किए हैं, जिनके हस्ताक्षरों का सत्यापन मुख्य सचिव द्वारा महाधिवेशन से पहले और बाद—दोनों समय किया गया है।”

यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब एक दिन पहले 11 से 14 जनवरी तक आयोजित विशेष महाधिवेशन के जरिए निर्वाचित गगन थापा–विश्व प्रकाश शर्मा गुट ने नए केंद्रीय कार्यसमिति को आधिकारिक मान्यता देने और अद्यतन करने के लिए निर्वाचन आयोग में आवेदन दिया था।

शुक्रवार सुबह देउबा समर्थक केंद्रीय कार्यसमिति सदस्यों ने पार्टी की वैधता को लेकर अपने दावे के समर्थन में निर्वाचन आयोग परिसर में धरना दिया। इस दौरान कार्यवाहक पार्टी अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड्का, धनराज गुरुङ, बिमलेन्द्र निधि, रमेश रिजाल, श्याम घिमिरे, कल्याण गुरुङ, जीत जंग बस्नेत सहित अन्य नेता मौजूद थे।

खड्का ने कार्यवाहक मुख्य निर्वाचन आयुक्त राम प्रसाद भंडारी को दस्तावेज और साक्ष्य सौंपते हुए कहा कि विशेष महाधिवेशन को आवश्यक संख्या में प्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त नहीं था।

विशेष महाधिवेशन के माध्यम से गगन थापा के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद, दोनों गुटों ने निर्वाचन आयोग में अपनी-अपनी दावेदारी को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं और पार्टी की आधिकारिक मान्यता पर दावा कर रहे हैं।

दोनों पक्षों द्वारा आवेदन और साक्ष्य जमा किए जाने के बाद, नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व की वैधता और आधिकारिक मान्यता पर फैसला करने का दबाव निर्वाचन आयोग पर बढ़ गया है। यह निर्णय आगामी प्रतिनिधि सभा चुनाव से पहले अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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