
कोलकाता, 16 जनवरी (हि.स.)। न्यायमूर्ति सुजय पॉल ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। वह जून, 2026 में सेवानिवृत्त होंगे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश और भारत सरकार की अधिसूचना के बाद उन्हें 16 जनवरी, 2026 से कलकत्ता उच्च न्यायालय का 44वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर वर्तमान और पूर्व न्यायाधीशों, विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, राज्य सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति रही।
उल्लेखनीय है कि, न्यायमूर्ति सुजय पॉल 18 जुलाई 2025 को कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने आठ अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में दायित्व संभाला। इससे पूर्व वे तेलंगाना उच्च न्यायालय में न्यायाधीश और बाद में वहां के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति पॉल ने अपने विधिक जीवन की यात्रा का उल्लेख किया और अपनी माता के योगदान को विशेष रूप से याद किया, जिन्होंने उनके पिता के निधन के बाद उन्हें एकल अभिभावक के रूप में पाला। उन्होंने कहा कि यद्यपि उन्होंने अपने करियर के अंतिम दौर में कलकत्ता उच्च न्यायालय को जॉइन किया, फिर भी वह संस्थान की गरिमा, पवित्रता और कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करेंगे।
उन्होंने अपने भाषण में नारद-स्मृति का उल्लेख करते हुए कहा, “न्यायालय तब तक न्यायालय नहीं है, जब तक उसमें बुजुर्ग न हों; बुजुर्ग तब तक बुजुर्ग नहीं हैं, जब तक वे धर्म का पोषण न करें, धर्म तब तक धर्म नहीं है, जब तक वह सत्य को बढ़ावा न दे और सत्य तब तक सत्य नहीं है, जब तक वह कुतर्क से मुक्त न हो।”--------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर