
नई दिल्ली, 16 जनवरी (हि.स.)।
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि भारत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से लोकतंत्र मजबूत हुआ है और शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों के संसदों की अध्यक्षों और पीठीसीन अधिकारियों की 28वें सम्मेलन के दौरान कही।
उपसभापति ने बताया कि भारत की तीन-स्तरीय शासन व्यवस्था- केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं की मौजूदगी से कामकाज में सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि आज देश में करीब 15 लाख महिलाएं पंचायतों और नगर निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं, जो दुनिया में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सबसे बड़ा उदाहरण है।
हरिवंश ने कहा कि महिला नेतृत्व वाले स्थानीय निकायों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी बेहतर हुई है। सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक सही तरीके से पहुंच रहा है। महिलाएं खासतौर पर पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसे कई राज्यों ने बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है।
उपसभापति ने कहा कि अब सोच में बदलाव आया है और जोर महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिला-नेतृत्व वाले विकास पर है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ बराबरी से शासन में भाग लेती हैं, तो लोकतंत्र और मजबूत होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी