बिहार में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर जमीअत उलमा के अध्यक्ष का बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र, कठोर कार्रवाई की मांग

17 Jan 2026 21:01:53
जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी


नई दिल्ली, 17 जनवरी (हि.स.)। जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने हाल के दिनों में बिहार में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध लगातार घटित मॉब लिंचिंग और हत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संदर्भ में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखकर दोषियों के विरुद्ध तत्काल, प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।

अपने पत्र में मौलाना मदनी ने उल्लेख किया है कि महात्मा बुद्ध की कर्मभूमि बिहार सामाजिक सौहार्द, करुणा और अहिंसा की शानदार परंपरा के लिए जानी जाती रही है, लेकिन हालिया घटनाओं ने राज्य की इस ऐतिहासिक पहचान को गंभीर रूप से आघात पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में नफरत फैलाने वाली मानसिकता को खुली छूट दी जा रही है, जिसमें सामान्य असामाजिक तत्वों के साथ-साथ संसद और विधानसभा तक के जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। जब नफरत हिंसा, खून-खराबे और हत्या का रूप ले ले, तब राज्य की चुप्पी अत्यंत घातक सिद्ध होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के रूप में नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जनता के डगमगाए विश्वास को बहाल करना आपकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

मौलाना महमूद मदनी ने पत्र में हालिया सभी गंभीर और चिंताजनक घटनाओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया है, जिनमें—नवादा जिले में मुस्लिम कपड़ा व्यापारी मोहम्मद अतहर हुसैन के साथ की गई बर्बरता और बाद में उनकी मृत्यु; गोपालगंज के मठिया गांव में अहमद आजाद को मांस रखने के संदेह में बिजली के खंभे से बांधकर सार्वजनिक रूप से पीटे जाने की घटना; मधुबनी ज़िले के चकदहा बस्ती में मोहम्मद मुर्शिद आलम को “बांग्लादेशी” बताकर अपहरण, शारीरिक यातना और अपमान का शिकार बनाए जाने का मामला; झंझारपुर में एक मामूली विवाद के बाद मोहम्मद कय्यूम की हत्या और मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत भैरवपट्टी गांव में एक विधवा मुस्लिम मजदूर हिना परवीन का अपहरण, कथित सामूहिक दुष्कर्म और नृशंस हत्या—जैसी दिल-दहला देने वाली घटनाएं शामिल हैं।

मौलाना मदनी ने विशेष रूप से हीना परवीन के साथ घटित जघन्य अपराध पर गहरा दुख, पीड़ा और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि छह मासूम बच्चों की एकमात्र संरक्षक असहाय विधवा की इस प्रकार निर्मम हत्या हमारे समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यकुशलता—दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

जमीअत उलमा-ए-हिंद ने मांग की है कि इन सभी मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध शीघ्र, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए; लापरवाही के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा, न्याय और पूर्ण पुनर्वास प्रदान किया जाए। साथ ही पुलिस और जिला प्रशासन को भीड़ द्वारा न्याय (विजिलेंटिज़्म), सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग और कानून के उल्लंघन की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाने के लिए स्पष्ट, ठोस और बाध्यकारी निर्देश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त मौलाना मदनी ने जमीअत उलेमा-ए-हिंद की सभी स्थानीय इकाइयों से अपील की है कि वह पीड़ित परिवारों—विशेषकर अनाथ बच्चों और अन्य जरूरतमंदों—की सहायता के लिए आगे आएं।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहम्मद शहजाद

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