

चंदौली, 17 जनवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जनपद चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया के एकीकृत न्यायालय परिसर (इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स) का शिलान्यास किया। इस दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्चतम न्यायालय के पांच तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 18 न्यायाधीश भी उपस्थिति रहे।
चंदौली में आयोजित कार्यक्रम नें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी व्यक्ति के अधिकारों का हनन होता है, तो वह अपने ही जिले में जाकर न्याय के लिए संघर्ष कर सके, इसी उद्देश्य से जिला न्यायपालिका की अवधारणा विकसित की गई। यह व्यवस्था न्याय को आम आदमी के और अधिक करीब लाने का माध्यम है। इसी संवैधानिक सोच को जमीन पर उतारने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 एकीकृत न्यायालय परिसर बनाने की घोषणा की थी, जिनमें से छह का शिलान्यास आज किया गया है।
उन्होंने कहा कि अब इन न्यायालय परिसरों में अधिवक्ताओं के लिए बेहतर और आधुनिक कार्यस्थल होंगे। सबसे अहम यह है कि आम नागरिक, जिसे ‘कंज्यूमर ऑफ जस्टिस’ कहा जाता है, उसके लिए भी सुविधाजनक और सुगम व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन परिसरों के निर्माण से उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा और ये न्यायालय परिसर राष्ट्रीय स्तर पर बेंचमार्क साबित होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी न्यायालय परिसर सच्चे अर्थों में न्याय के मंदिर साबित होंगे, जहां मानवीय मूल्यों के साथ निष्पक्ष न्याय दिया जाएगा और अधिवक्ता इस कार्य में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब वे अन्य राज्यों का दौरा करेंगे, तो वहां की राज्य सरकारों और उच्च न्यायालय के समक्ष उत्तर प्रदेश के इस मॉडल का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की न्यायिक सुविधाएं विकसित की जा सकें। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अनुरोध किया कि जहां संभव हो, वहां महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग सुविधाएं विकसित की जाएं। साथ ही इन परिसरों में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बनाया जाए, ताकि न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। उन्होंने इस कार्य के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और इलाहाबाद उच्च न्यायालय को भी बधाई दी।
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी न्यायाधीशों का स्वागत कर कहा कि प्रदेश में एकीकृत न्यायालय परिसर के लिए धन की कमी नहीं है। इस कार्य में सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट में इन 06 जिलों में न्यायालय परिसर की नींव रखी गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले चरण में इन छह जनपदों के लिए धनराशि भेज दी है। डिजाइन स्वीकृत हो चुका है तथा सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। शिलान्यास के बाद एलएंडटी जैसी संस्था द्वारा निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आज के दिन को न्यायिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए मजबूत न्यायपालिका और बेहतर न्यायिक ढांचा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि देश के मुख्य न्यायाधीश की प्रेरणा से यह सुविधा उत्तर प्रदेश के छह जिलों- चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया में शुरू की जा रही है। अन्य जिलों में भी अगले कुछ महीनों में इसी तरह का कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने न्यायालय परिसर के लिए चंदौली सहित सभी जिलों के अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों के संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के साथ समन्वय कर सरकार ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने वाराणसी में भी एकीकृत न्यायालय परिसर बनाने की घोषणा की।
एकीकृत न्यायालय परिसर की कुल लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये
चंदौली जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने बताया कि प्रदेश के छह जिलों में बनने वाले एकीकृत न्यायालय परिसर की कुल लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि चंदौली में बनने वाले न्यायालय परिसर की लागत करीब 236 करोड़ रुपये होगी, जिसमें 37 न्यायालय कक्ष, अधिवक्ताओं के चेंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, जनपद न्यायाधीश का आवासीय भवन शामिल होंगे। यह परियोजना लगभग 18 माह में पूरी होने की संभावना है और अप्रैल 2027 तक कार्य पूर्ण किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी