
कोलकाता, 19 जनवरी (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चर्चित हस्तियों को सुनवाई के लिए बुलाए जाने को लेकर उठे विवादों को भारतीय निर्वाचन आयोग ने निराधार बताया है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि दावे और आपत्तियों से जुड़ी सुनवाई के लिए किसी भी मतदाता को बुलाना पूरी तरह प्रक्रिया के तहत है और इसमें किसी प्रकार का पक्षपात नहीं किया गया है।
हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस को सुनवाई के लिए बुलाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। इसे लेकर सवाल उठाए गए कि नेताजी के परिवार से जुड़े व्यक्ति को नोटिस क्यों भेजा गया।
इस पर पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चंद्र कुमार बोस को भी अन्य मतदाताओं की तरह ही बुलाया गया है। कार्यालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि उनके गणना प्रपत्र में पारिवारिक संबंध जोड़ने वाला कॉलम खाली छोड़ा गया था। इसी कारण उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की अधिसूचना के तहत जिन मतदाताओं के प्रपत्रों में आवश्यक विवरण अधूरा पाया गया है, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।
इससे पहले अभिनेता से नेता बने और तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य दीपक अधिकारी, पूर्व राज्यसभा सदस्य और मोहन बागान फुटबॉल क्लब के पूर्व अध्यक्ष स्वपन साधन बोस, उनके पुत्र और पूर्व राज्यसभा सदस्य सृंजय बोस तथा भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को भी इसी तरह की सुनवाई के नोटिस भेजे गए थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि इन सभी मामलों में भी गणना प्रपत्रों में संबंध जोड़ने वाला कॉलम खाली था। यदि संबंधित लोगों ने पहले ही कारण की जानकारी ले ली होती, तो इस तरह के राजनीतिक विवाद पैदा नहीं होते।
उल्लेखनीय है कि, मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि सोमवार को समाप्त हो रही है। हालांकि, सुनवाई की प्रक्रिया 7 फरवरी तक जारी रहेगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग का पूर्ण पीठ पश्चिम बंगाल का दौरा करेगा और उसके बाद विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा किए जाने की संभावना है।--------------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर