
नई दिल्ली, 19 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि साहित्य देश निर्माण का सशक्त माध्यम है और लेखकों को ऐसी रचनाएं करनी चाहिए जो राष्ट्रप्रेम, त्याग और स्वाभिमान की भावना जगाएं।
मेघवाल ने यहां गर्वी गुजरात भवन में भारतीय भाषा और साहित्य संगम द्वारा विश्व पुस्तक मेला में भाग लेने आए साहित्यकारों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और सकारात्मक बदलाव लाने वाला प्रभावशाली माध्यम है। लेखनी जब राष्ट्रहित से जुड़ती है तो वह समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें संस्कृति, इतिहास तथा मूल्यों से जोड़ने वाले साहित्य की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश प्रेम नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विचार और व्यवहार में भी दिखना चाहिए। त्याग, सेवा, ईमानदारी और आत्मसम्मान जैसे मूल्यों को साहित्य में स्थान देने से समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्यकारों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है, क्योंकि वे अपनी रचनाओं से निराशा और हिंसा के स्थान पर सद्भाव और समाधान का मार्ग दिखा सकते हैं।
मेघवाल ने बताया कि सरकार साहित्य और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने राजस्थानी भाषा की मिठास और सरलता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रवासी राजस्थानियों द्वारा यह भाषा दुनिया भर में बोली जाती है। उन्होंने संस्कृति पुरुष केसी मालू के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने लोकगीतों और संगीत के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जगाई।
कार्यक्रम में भारतीय भाषा और साहित्य संगम जयपुर के संरक्षक हेमजीत मालू, अध्यक्ष डॉ. कुमेश कुमार जैन और वरिष्ठ सलाहकार पुरुषोत्तम दिवाकर ने अतिथियों का स्वागत किया। दूरदर्शन के निदेशक अखिलेश शर्मा सहित कई साहित्यकार उपस्थित रहे।
इस दौरान संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला से शिष्टाचार भेंट कर गतिविधियों की जानकारी दी और विश्व पुस्तक मेला के विभिन्न स्टालों को भी देखा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर