15 सौ करोड़ के जमीन घोटाले मामले में सुरेंद्रनगर के पूर्व कलेक्टर राजेंद्र पटेल गिरफ्तार

02 Jan 2026 19:37:53
1500 करोड़ रुपये का ज़मीन घोटाला


गांधीनगर, 02 जनवरी (हि.स.)। गुजरात के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचाने वाले लगभग 1500 करोड़ रुपये के ज़मीन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने सुरेंद्रनगर के तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र पटेल को गिरफ्तार कर लिया है।

सोमवार को गांधीनगर स्थित उनके निवास पर तीन अलग-अलग टीमों ने लंबी पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की। सूत्रों के अनुसार करीब तीन घंटे तक चली गहन पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पूर्व कलेक्टर की गिरफ्तारी की गई है। सूत्रों ने बताया कि अब आरोपित पूर्व

कलेक्टर को ईडी विशेष अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी।

खेती की जमीन को बिनखाती करने में बड़ा खेल हुआ

जांच में सामने आया है कि सुरेंद्रनगर में खेती की ज़मीन को बिनखाती करने के बदले करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन हुआ। आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर नियमों को दरकिनार करते हुए ज़मीनों के दर्जे में बदलाव कराया गया। इस घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने 23 दिसंबर 2025 को सुरेंद्रनगर में तत्कालीन कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस मामले में पहले ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में भी प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।

इस प्रकरण में पहले चंद्रसिंह मोरी (नायब मामलतदार), मयूर गोहिल (कलेक्टर कार्यालय का कर्मचारी) और जयराजसिंह झाला (कलेक्टर का निजी सहायक) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। अब राजेंद्र पटेल की गिरफ्तारी के बाद अन्य बड़े नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

सरकार ने पहले ही किया था तबादला

जांच की आंच आते ही राज्य सरकार ने राजेंद्र पटेल का सुरेंद्रनगर से तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया था। इसके बावजूद प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन और भ्रष्टाचार के पहलुओं की जांच जारी रखी गई, जिसका परिणाम अब गिरफ्तारी के रूप में सामने आया है।

गुजरात के ज़मीन घोटाले की जांच के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया है। 23 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय की दिल्ली स्थित विशेष टीम ने नायब मामलतदार चंद्रसिंह मोरी के आवास पर छापेमारी में उनके बेडरूम से 67.50 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। जांच के दौरान चंद्रसिंह मोरी ने स्वीकार किया था कि यह रकम ज़मीन के उद्देश्य परिवर्तन (हेतुफेर) से जुड़ी अर्जियों के तेज़ और अनुकूल निपटारे के लिए सीधे अथवा बिचौलियों के माध्यम से आवेदकों से रिश्वत के रूप में ली गई थी। इस बरामदगी के बाद मामले में भ्रष्टाचार और धनशोधन के आरोप और मजबूत हो गए।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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