हमारी संस्कृति और स्वभाव की जड़ें हमेशा मजबूत रहनी चाहिए: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

02 Jan 2026 18:36:53
शब्दोत्सव में शामिल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एवं मंत्री कपिल मिश्रा


नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि विकास और प्रगति हमारी प्राथमिकता है, लेकिन हमारी संस्कृति और स्वभाव की जड़ें हमेशा मजबूत रहनी चाहिए।

मुख्य अतिथि के रूप में रेखा गुप्ता ने यह बात आज दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में तीन दिवसीय 'दिल्ली 'शब्दोत्सव' 2026' के उद्घाटन के दौरान कही। यह कार्यक्रम प्रदेश सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग और सुरुचि प्रकाशन द्वारा आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीयता, संस्कृति और साहित्य का समागम करना है।

इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में रेखा गुप्ता, विशिष्ट अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, दिल्ली शब्दोत्सव के संयोजक हर्ष वर्धन त्रिपाठी और सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली सहित अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।

​मुख्यमंत्री ने कहा, यह मंच भारतीय इतिहास के तीनों कालों, अतीत, वर्तमान और भविष्य, के बीच संवाद स्थापित करेगा, जो वैदिक युग से लेकर आज के डिजिटल युग तक भारत की प्रगति को दर्शाएगा।

दिल्ली संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि जब कोई पत्थर उठता है सेना के ऊपर या कोई पत्थर चलता है पुलिस के ऊपर या कोई पत्थर चलता है मंदिर के ऊपर, वह पत्थर हाथ में बाद में आता है और दिमाग में पहले आता है।

​जो नक्सली बंदूक उठाता है, कोई जिहादी आतंकवादी बंदूक उठाता है, डॉक्टर होकर भी बम बनके फटने को तैयार हो जाता है, वह बम हाथ में बाद में आता है, दिमाग में पहले उसे रखा जाता है। ये जो दिमाग में बंदूकें और बम रखने का ये जो वैचारिक आतंकवाद है, इस वैचारिक आतंकवाद पर सर्जिकल स्ट्राइक है ये दिल्ली का शब्दोत्सव।

​मंत्री ने कहा, हमने भी ये संकल्प लिया है कि दिल्ली को नक्सली विचारधारा, झूठे इतिहास, धर्म विरोधी सोच, इससे मुक्ति दिलाने के लिए जो संभव होगा वह करेंगे और इसकी ये शुरुआत दिल्ली शब्दोत्सव से हम लोग कर रहे हैं।

उन्होंने घोषणा की कि यह आयोजन हर वर्ष होगा।

राजीव तुली ने कहा कि जब इस देश का समाज जागेगा और संगठित होगा, तो वह ऐसे भव्य, दिव्य, आध्यात्मिक, सामाजिक, साहित्यिक कार्यक्रम करेगा। इससे विश्व को पता चलेगा, कि भारत क्यों विश्व गुरु है या भारत को क्यों विश्व गुरु बनना चाहिए। तो वह चाहे कुंभ का आयोजन हो, चाहे इस साहित्यिक और सांस्कृतिक कुंभ का आयोजन हो।

सत्र का पहला दिन स्वावलंबन से शौर्य और भीतर का रण:आंतरिक मोर्चे की चुनौतियों पर केंद्रित रहा। सांस्कृतिक संध्या 6 बजे शुरू हुई, जिसमें माधवाज बैंड और हर्षदीप कौर ने प्रस्तुति दी।

सत्र के दूसरे दिन (03 जनवरी) को 'हिन्दू इतिहास', 'मिथक का सत्य', 'सिनेमा में हिन्दू', 'वंदे मातरम और बंगाल' जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर सत्र होंगे। शाम 5:30 बजे से शुरू होने वाली सांस्कृतिक संध्या में प्रहलाद सिंह टिपाणिया और पांडवाज बैंड अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

उत्सव के अंतिम दिन 'संघ शक्ति कलियुगे' और ‘देश की आंतरिक एवं बाह्म सुरक्षा पर उद्बोधन’ जैसे समसामयिक एवं वैचारिक सत्र आयोजित होंगे। समारोह का समापन सत्र शाम 5:30 बजे साधो बैंड और गायक हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुति के बाद किया जाएगा। 5:15 बजे तक होगा।

​इस मौके पर तीन दिन में 40 से अधिक पुस्तकों का लोकार्पण, ​छह बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम, दो बड़े कवि सम्मेलन, ओपन माइक (युवाओं के लिए), विभिन्न प्रकाशनों के बुक स्टॉल (सुरुचि, प्रभात, गरुण आदि), भोजन के फूड स्टॉल, 100 से अधिक वक्ता और कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र शामिल होंगे।

यह कार्यक्रम सुबह 10:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक चलेगा और प्रवेश निःशुल्क है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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