कोलकाता, 02 जनवरी (हि.स.)।पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल नौकरी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य सरकार के एक मंत्री की संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने मंत्री के साथ उनकी पत्नी और बेटे के नाम दर्ज कुल 10 संपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी कुल बाजार कीमत करीब 3.60 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ईडी से जुड़े सूत्रों के अनुसार संपत्तियों का मूल्यांकन उस समय की कीमत के आधार पर किया गया है, जब इनका पंजीकरण हुआ था। हालांकि मौजूदा बाजार में इन संपत्तियों की कीमत लगभग दोगुनी बताई जा रही है। केंद्रीय एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि मंत्री इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम के वैध स्रोत का ठोस प्रमाण नहीं दे पाए, तो इन्हें नीलामी के जरिए बेचा जाएगा।
ईडी पहले ही स्कूल नौकरी घोटाले में दाखिल आरोप पत्र में उन्हें आरोपित बना चुकी है। आरोप है कि मंत्री ने प्राथमिक स्कूलों में नौकरी दिलाने के नाम पर अयोग्य उम्मीदवारों से करीब 12.75 करोड़ रुपये वसूले थे।
ईडी के आरोप पत्र में यह भी दावा किया गया है कि मंत्री ने कुल 159 अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश की थी और औसतन हर उम्मीदवार से करीब आठ लाख रुपये लिए गए थे। एजेंसी का कहना है कि मामले में मंत्री से और पूछताछ की जरूरत है, इसी वजह से उन्हें हिरासत में लेने की आवश्यकता बताई जा रही है।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने इस मामले में ईडी द्वारा दाखिल आरोप पत्र को मंजूरी दी थी। जांच के दौरान ईडी को मंत्री का नाम बिचौलिए और अब निलंबित तृणमूल कांग्रेस नेता कुंतल घोष की डायरी से मिला था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
मार्च 2024 में ईडी ने बीरभूम जिले के बोलपुर स्थित मंत्री के आवास पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने उनके घर से 41 लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन जब्त किया था।
उक्त मंत्री तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता और बीरभूम जिले के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के करीबी माने जाते हैं। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर