
शंकराचार्य कौन होगा यह देश के राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री को अधिकार नहीं: शंकराचार्य
प्रयागराज, 20 जनवरी (हि.स.)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शंकराचार्य कौन होगा, यह तय करने का अधिकार देश के राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को नहीं है। उन्हेें उच्चतम न्यायालय के जिस आदेश को लेकर नोटिस दिया गया है। उसकी अवमानना माघ मेला के अधिकारियों ने
की है। उन्होंने कहा कि नोटिस का जवाब और अवमानना का नोटिस भी दिया जाएगा। उन्होंने माघ मेलाधिकारियों पर मीडिया को गलत जानकारी देने काभी आरोप लगाया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंगलवार को यहां पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के नोटिस के सवाल पर कहा कि उन्हेें उच्चतम न्यायालय के जिस आदेश को लेकर नोटिस दिया गया है, उस आदेश को अधिकारियों को पढ़ लेना चाहिए था। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिकारी में इतनी योग्यता नहीं है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को ढंग से अध्ययन कर लेते। अगर किया होता तो वह न्यायालय के अवमानना से बच जाते। उन्होंने कहा कि किसी पीठ का शंकराचार्य अन्य तीन पीठ के शंकराचार्यों की मान्यता से ही तय हो हैं। भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करें कि शंकराचार्य कौन होगा।
महाराज ने कहा कि माघ मेला अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस में झूठी जानकारी दी गई है। इस संबंध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के अधिवक्ता डाक्टर पीएन मिश्रा ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहीं ऐसा नहीं कहा है कि इन्हें शंकराचार्य को रोका जाए। उच्चतम न्यायालय एवं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेशों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक संविधान में किसी भी तरह से हस्ताक्षेप नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि पिता की मौत हो जाती है तो उसके बेटे का नाम स्वत: चढ़ा दिया जाता है। ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी ने वसीयत करके पीठ का पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बनाया था। यह वसीयतनामा 1 फरवरी 2017 महाराज ने पंजीकृत कराया था। जिसके बाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के ब्रह्मलीन होने के दूसरे दिन उनका पट्टाभिषेक कर दिया गया। जिसे गुजरात के उच्च न्यायालय ने सही माना है।
महाराज के अधिवक्ता ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में ही शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज कहकर संबोधित किया है। न्यायालय ने कहीं नहीं कहा है कि वह शंकराचार्य नहीं लिख सकते हैं। मेला प्राधिकरण के अधिकारियों ने उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवमानना की है। अवमानना का मुकदमा भी दाखिल किया जाएगा। प्राधिकरण की नोटिस का जवाब 24 घंटे के भीतर दे दिया जाएगा।
शंकराचार्य के अधिवक्ता कहा कि 22 सितंबर 2017 के निर्णय में यह भी कहा है कि चार पीठों के अतिरिक्त कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता है। हालांकि संज्ञान में आया है मेला में 15 लोग शंकराचार्य लिखे हुए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाय , लेकिन अब तक फर्जी शंकराचार्य लिखने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। अंत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने कहा कि नोटिस का जवाब भी भेजा जाएगा और अवमानना की भी नाेटिस भी मेला प्राधिकरण को दी जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामबहादुर पाल